ये सात अधिकारी चाहें तो नींद हराम कर सकते हैं मोदी की
जब बात हो नरेंद्र मोदी की 'लहर' की तो क्यों ना जानें कुछ भीतरी बातें। खुद को पाक-साफ कहने वाली मोदी सरकार भी लगे हैं दाग। अब दाग अच्छे हैं या बुरे, यह तो न्यायपालिका तय करती है, पर तथ्य और तत्व में उलझी है मोदी की अच्छाइयां और बुराइयां। गुजरात में कई ऐसे प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी हैं जो मोदी की सत्ता के लिए चुनौती साबित हुए हैं।
मोदी समर्थकों का कहना है कि इन अफ़सरों ने गुजरात के मुख्यमंत्री पर 'झूठे' आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, ऐसे लोग भी हैं जो मानते हैं कि ये अफ़सर निडर हैं और उन्हें 'सच' बोलने की सज़ा मिल रही है। स्लाइडर का पहिया घुमाएं और जानें, कौन-कौन से हैं वे दिलेर अफसर, जिनसे नहीं मिल पाया मोदी का दिल -

संजीव भट्ट का सच
संजीव भट्ट ने गुजरात दंगों की जाँच करने वाले विशेष दल (एसआईटी) और नानावटी कमीशन से कहा कि वे उस मीटिंग में मौजूद थे जिसमें गोधरा कांड के बाद नरेंद्र मोदी ने कथित तौर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से दंगाइयों से नरमी से निपटने को कहा था।
संजीव भट्ट का दावा है कि इसके बाद ही उन्हें निलंबित किया गया, उनके ख़िलाफ़ 15 से 20 साल पुराने दो केसों की जाँच शुरू हो गई। भट्ट को बाद में गिरफ़्तार भी किया गया था।

राहुल शर्मा (डीआईजी) का पेंच
जांच एजेंसियों को 2002 के दंगों के दौरान कुछ भाजपा नेताओं की फ़ोन पर हुई बातचीत की सीडी दी। मोदी की कैबिनेट में मंत्री माया कोडनानी और विश्व हिंदू परिषद के एक नेता की गिरफ़्तारी इस सीडी के बग़ैर संभव नहीं थी।

आरबी श्रीकुमार की 'श्री बहादुरी'
गोधरा कांड की जाँच के लिए गठित नानावटी-शाह आयोग के सामने मोदी के ख़िलाफ़ गवाही और दस्तावेज़ देने वाले पहले पुलिस अधिकारी थे। उन्होंने दंगों की जाँच कर रहे विशेष जांच दल एसआईटी को भी सरकार के खिलाफ़ दस्तावेज़ सौंपे।

कुलदीप ने जलाया विरोध का दीप
सोहराबुद्दीन शेख फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले में सीबीआई को कई अहम जानकारी दीं जिनकी कड़ी मोदी के नज़दीकी अमित शाह तक पहुँची। कुलदीप शर्मा ने मोदी और शाह पर आरोप लगाया कि उन पर दबाव डाला गया कि वह सामाजिक कार्यकर्ता मल्लिका साराभाई को एक इमीग्रेशन रैकेट चलाने के केस में फंसा दें।

प्रदीप शर्मा से भी भिड़ंत
प्रदीप शर्मा ने एक महिला की जासूसी कराने के मामले की सीबीआई जाँच की माँग की है। उन्होंने शाह और मोदी पर इसमें शामिल होने का आरोप लगाया है, इस मामले को ही 'स्नूपगेट' कहा जा रहा है।
प्रदीप शर्मा का कहना है कि उनके ख़िलाफ़ 2001 में भूकंप पीड़ितों के पुनर्वास के दौरान ग़बन का केस फाइल किया गया। गुजरात सरकार शर्मा के ख़िलाफ़ जासूसी मामले में भी सुप्रीम कोर्ट में गई है।

सतीश वर्मा से भी उलझी गुजरात सरकार
विशेष जांच दल (एसआईटी) के प्रमुख सदस्य सतीश वर्मा ने इशरत जहाँ एनकाउंटर को फ़र्ज़ी बताया और एसआईटी के कुछ सदस्यों पर आरोप लगाया कि वे जाँच को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं। वर्मा का कहना है कि राज्य सरकार ने कथित दुर्व्यवहार के 15 साल पुराने एक मामले में उन्हें नोटिस दिया। गुजरात सरकार ने उनके खिलाफ 1996-97 के एक कथित फ़र्ज़ी एनकाउंटर केस की जांच भी दोबारा शुरू करवा दी।

रजनीश राय और रंजिश
2007 में स्टेट सीआईडी (क्राइम) में डीआईजी के तौर पर तैनात राय ने आईपीएस अधिकारियों डीजी वंजारा और राजकुमार पांडियन को सोहराबुद्दीन शेख फ़र्ज़ी एनकाउंटर मामले में गिरफ्तार किया। राय कहते हैं कि गुजरात सरकार ने उनका प्रमोशन रोक दिया और वार्षिक कॉन्फ़ीडेंशियल रिपोर्ट (एसीआर) डाउनग्रेड कर दी।












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