भारत ने सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी का सफलतापूर्वक परीक्षण किया
श्रीहरिकोट। भारत के वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष के मिशन में बड़ी सफलता हाथ लगी है। इसरो के वैज्ञानिको ने देश के सबसे भारी रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजने सफलता पायी है। वैज्ञानिकों ने श्रीहरिकोट से जीएसएलवी मार्क 3 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। इसके साथ ही भारत दुनिया के उन देशों में शामिल हो गया है जो अंतरिक्ष में सैटेलाइट भेजने की काबिलियत रखते हैं।
भारत ने जीएसएलवी को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा है। इस रॉकेट के जरिए भारत संचार की सैटेलाइट्स एनसैट-4 जिसका वजन तकरीबन 4500 से 5000 किलोग्राम होता है आसानी से भेजा जा सकता है। इसके साथ ही भारत अब किसी और देश के रॉकेट पर निर्भर नहीं रहेगा।
इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार इस रॉकेट पर 140 करोड़ रुपए का खर्च और क्रू मॉड्यूल पर 15 करोड़ रुपए का खर्च आया। 630 टन वजन का जीएसएलवी-एमके-3, 3.65 टन के भार के क्रू मॉड्यूल को लेकर गया है। इसअभियान के सफल होने के बाद अब इसरो को भारी उपग्रहों को उनकी कक्षा में पहुंचाने में मदद मिलेगी। भारत के वैज्ञानिकों की इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी है।

दुनिया के चुनिंदा देशों में भारत शामिल
जीएसलवी-3 के सफलतापूर्वक प्रक्षेपण के साथ ही भारत उन देशों के साथ खड़ा हो गाय है जो अतरिक्ष में बड़े सैटेलाईट भेजने की काबिलियत रखते हैं।

भारत भी अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजने में सक्षम
जीएलएलवी मार्क-3 के सफलतापूर्व प्रक्षेपण के साथ ही भारत ने अब अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजने के अभियान में एक अहम पड़ाव पार कर लिया है।

140 करोड़ में भेजा जीएसएलवी मार्क-3
भारत के वैज्ञानिकों ने इस रॉकेट पर महज 140 करोड़ रुपए और और क्रू मॉड्यूल पर 15 करोड़ रुपए का खर्च करके इसका सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।

बेहतर होगी संचार सुविधा
जीएसएलवी मार्क-III से भारी कम्युनिकेशन सैटलाइट्स को लॉन्च करने मदद मिलेगी जिससे देश की संचार सुविधायें बेहतर होंगी।

दुनिया के अग्रणी देशों में भारत
भारी और वजनी सैटेलाइट और अंतरिक्ष में इंसान भेजने की क्षमता अभी तक रूस, अमेरिका और चीन के पास थी लेकिन भारत भी अब इन देशों के श्रेणी में खड़ा हो गया है।

भारी भरकम है ये रॉकेट
इस रॉकेट का वजन 630 टन है। इसकी ऊंचाई करीब 42 मीटर है और यह 4 टन का वजन ले जा सकता है।

जटिलतम परिस्थितियों से लड़ने की क्षमता
1600 डिग्री सेल्सियस तक के गरम वायुमंडल से कैप्सूल को सकुशल धरती पर वापस लाने में यह रॉकेट सक्षम है।












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