Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

चंद्रयान-2 की विफलता ने लिखी तीसरे मिशन की सफलता की कहानी, 9 सदस्यीय टीम का रहा अहम योगदान

इसरो के चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त को मून के दक्षिणी हिस्से में सॉफ्ट लैंडिग कर इतिहास लिख दिया। चंद्रयान के साउथ पोल पर सफलतापूर्वक उतरना अपने आप में एक कहानी है। कैसे एक कुशल विश्लेशण ने अंतरिक्ष एजेंसी को बड़े झटके के बाद वापसी करने में मदद की। ये काम एलपीएससी के डायरेक्टर वी. नारायणन के नेतृत्व में किया गया था।

चंद्रयान -2 के असफल होने के बाद इसके कारणों का पता लगाने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था। तरल प्रणोदन सिस्टम्स सेंटर (एलपीएससी) का नेतृत्व करने वाले डॉ. नारायणन को समिति की कमान सौंपी गई थी।

ISRO ,Chandrayaan 2, V Narayanan, Chandrayaan 3, इसरो, चंद्रयान 2, वी नारायणन, चंद्रयान 3

इस समिति ने चंद्रयान -2 लैंडर दुर्घटना के कारणों का विश्लेषण किया और चंद्रयान -3 में शामिल किए गए महत्वपूर्ण सुधारों की सिफारिश की। द हिंदू के मुताबिक, डॉ. नारायणन ने बताया कि, नौ सदस्यीय पैनल द्वारा एक बहु-विषयक समीक्षा ने चंद्रयान -2 के प्रदर्शन के सभी पहलुओं का विश्लेषण किया और एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट दे दी थी।

इस टीम ने अधिकांश प्रणालियों की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए उनमें सुधार की सिफारिश की थी। व्यावहारिक रूप से सभी सिफारिशों (एक या दो को छोड़कर, जिन्हें महत्वपूर्ण नहीं माना गया था) को लागू कर दिया गया।

जुलाई 2019 में श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया चंद्रयान -2 मिशन तब तक सामान्य रूप से काम कर रहा था। जब तक कि चंद्रमा की लैंडिंग साइट पर उतरने के दौरान 2.1 किमी की ऊंचाई पर उसका 'विक्रम' लैंडर से संपर्क नहीं टूट गया।

डॉ. नारायणन ने बताया कि, समिति ने अन्य चीजों के अलावा सॉफ्टवेयर पैकेज, नेविगेशन, मार्गदर्शन नियंत्रण प्रणाली, प्रणोदन तंत्र और पावर्ड डेसेंट स्कीम और विक्रम लैंडर प्रणाली का विश्लेषण किया और सुधार का सुझाव दिया। उनकी सिफारिशों में अंतरिक्ष यान में प्रणोदक मार्जिन को बढ़ाना और लैंडर पैरों को मजबूत करना शामिल था।

डॉ. नारायणन ने कहा कि, पूरे सॉफ्टवेयर सिस्टम को सत्यापित, मान्य और मजबूत किया गया था, क्योंकि एक बार पावर्ड डेसेंट (चंद्र सतह पर) शुरू होने के बाद, सब कुछ स्वायत्त होता है और सटीकता के साथ काम करना पड़ता है।

डॉ. नारायणन ने एक रॉकेट प्रणोदन विशेषज्ञ के तौर पर 1984 में इसरो के साथ अपना करियर शुरू किया था। उन्होंने चंद्रयान-3 को "एक आदर्श मिशन" का रुप देने में अहम भूमिका निभाई। जिसके चलते पूरा मिशन ने बिना गलती के अच्छे से काम किया। जिसके परिणाम स्वरूप भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला पहला देश बन गया।

क्रायोजेनिक इंजीनियरिंग में एम.टेक और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी डॉ. नारायणन ने इसरो में क्रायोजेनिक प्रणोदन प्रणाली के विकास में प्रमुख भूमिका निभाई है। जिसमें एलवीएम3 रॉकेट में प्रयुक्त सी25 क्रायोजेनिक ऊपरी चरण भी शामिल है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+