PSLV को बदलने के लिए इसरो विकसित कर रहा नया रॉकेट, जानिए क्या होंगे फायदे
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) नामक एक रॉकेट विकसित कर रहा है। इसके जरिए पुराने वर्कहॉर्स पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) को रिप्लेस किया जाएगा, जिसे 1980 के दशक में विकसित किया गया था। इस बात की जानकारी इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने गुरुवार को वालियामाला में 'इंजीनियर्स कॉन्क्लेव 2022' के मौके पर एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान दी।

सोमनाथ ने बताया कि पीएसएलवी को 1980 के दशक में विकसित किया गया था। ऐसे में यह 2020 की जरूरतों को पूरा नहीं करता है। इसलिए इसमें विकास की जरूरत है। हालांकि, पीएसएलवी को रिप्लेस करने के समय को लेकर उन्होंने कोई सटीक तारीख नहीं बताई। लेकिन उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अनुमोदित शेष प्रक्षेपणों को पूरा करने के बाद इसरो रॉकेट का उपयोग बंद कर देगा।
NGLV में उपयोग की जाने वाली विशेष प्रणोदन तकनीक के बारे में पूछे जाने पर भी उन्होंने जवाब दिया। सोमनाथ ने कहा कि यह 'सेमी-क्रायोजेनिक' तकनीक का उपयोग करेगा जो अच्छा भी होगा और लागत भी कम आएगी। उन्होंने संकेत दिया कि नए रॉकेट को दोबारा भी प्रयोग किया जा सकेगा। हालांकि, उन्होंने इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं शेयर की। लेकिन यह जरूर बताया कि रॉकेट का पेलोड लगभग पांच टन होगा और जरूर पड़ने पर 10 टन तक बढ़ाया जा सकेगा। सोमनाथ ने कहा कि बाजार की मौजूदा जरूरतों का विश्लेषण करने के बाद पेलोड मानकों का निर्धारण किया गया है।
सोमनाथ ने कहा कि नए रॉकेट के विकास की शुरुआत से ही उद्योग की भागीदारी आवश्यक थी। यह सुनिश्चित करेगा कि इसरो के बाहर वाणिज्यिक आधार पर इसे बनाने, संचालित करने और लॉन्च करने की क्षमता पैदा हो। पत्रकारों को संबोधन करते हुए उन्होंने कहा कि उद्योग के लिए राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में इस रॉकेट (एनजीएलवी) का समर्थन और निर्माण करना संभव है, जिसे पर्याप्त समय के लिए संचालित किया जा सकता है।
इसके अलावा सोमनाथ ने कहा कि इसरो फसलों के विकास के पैटर्न का भी अध्ययन करने, सिंचाई की कमियों की पहचान करने और जानकारी प्रदान करने के लिए एक 'भारत कृषि उपग्रह' विकसित करने के लिए केंद्रीय कृषि विभाग के साथ चर्चा में भी लगा हुआ है। इसका प्रयोग कीट नियंत्रण और कृषि बीमा दावों के सत्यापन में भी किया जा सकेगा। साथ ही इस उपग्रह का प्रयोग अन्य जरूरत की चीजों में किया जा सकेगा।
सोमनाथ ने कहा कि हम कृषि विभाग को समर्थन देंगे। उपग्रहों का स्वामित्व और संचालन उनके द्वारा किया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी देश के स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन सिस्टम NaVIC के नागरिक उपयोग को बढ़ाने की संभावना भी तलाश रही है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि प्रयासों का कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है। लेकिन इस क्षेत्र में धीर-धीरे शोध किया जा रहा है।
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