जिसे समझ रहे थे उल्कापिंड, वो निकला दूसरी दुनिया का विमान! क्या वैज्ञानिकों को मिल गई एलियंस की टेक्नोलॉजी?

कराकस, 30 सितंबरः पृथ्वी की सतह से टकराने वाले क्षुद्रग्रहों ने वैज्ञानिकों को तब बेहद हैरान कर दिया था जब उन्होंने पाया कि इन क्षुद्रग्रहों में कुछ ऐसे यौगिक हैं जिन्हें शोधकर्ताओं ने कुछ साल पहले तैयार किया था। वैज्ञानिकों द्वारा ये यौगिक 1957 से 1968 के बीच एक प्रयोगशाला में तैयार किये गऐ थे। वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि ये यौगिक बिजली के बेहतर कंडक्टर साबित होंगे। वैज्ञानिकों ने इनका नाम हीडाइट और ब्रेजिनाइट रखा था।

वैज्ञानिकों का दिमाग चकाराया

वैज्ञानिकों का दिमाग चकाराया

हालांकि ये दोनों ही यौगिक मानवनिर्मित थे लेकिन कुछ ही वर्षों के बाद ये पृथ्वी पर गिरने वाले उल्कापिंडों में भी देखे गए। जाहिर था कि ये यौगिक जो कि उल्कापिंड में पाए गए थे उनका निर्माण पृथ्वी पर की किसी प्रयोगशाला में नहीं हुआ था। यह देख दुनिया के सबसे तेज दिमाग वाले माने जाने मानव यानी कि वैज्ञानिक बेहद आश्चर्य में पड़ गए। ये खनिज अंतरिक्ष की चट्टानों तक कैसे पहुंचे इस पर लगभग छह दशकों से वैज्ञानिकों का मनन जारी है मगर ये रहस्य है कि अब तक सुलझ नहीं पाया है। इस बीच केंद्रीय विश्वविद्यालय वेनेजुएला के भौतिक विज्ञानी बीपी एम्बैड उन खनिजों के बीच बिंदुओं को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें वैज्ञानिकों ने प्रयोगशालाओं में बनाया था।

ऐलियन के यान का टुकड़ा था उल्कापिंड?

ऐलियन के यान का टुकड़ा था उल्कापिंड?

बीपी एंबैड के सुझाव के मुताबिक यह संभव है कि वे यौगिक जो अंतरिक्ष ये यहां आए हैं वे प्राकृतिक नहीं बल्कि कृत्रिम हों। एम्बैड का मानना है कि ये कम्पाउंड दूसरे ग्रहों की टेक्नोलॉजी का प्रमाण हो सकते हैं। एम्बैड का तर्क है कि ब्रेज़िनाइट और हेइडाइट अद्वितीय फॉर्मूलेशन और लेयरिंग के साथ बेहद अजीब खनिज थे, इसलिए इसपर यकीन किया जा सकता है कि वे स्वाभाविक रूप से बने नहीं हो सकते हैं। एम्बैड के मुताबिक ये किसी विदेशी प्रयोगशाला से आए खनिज हैं।

एलियन के दावे को ठुकराया

एलियन के दावे को ठुकराया

हालांकि यह एक विवादास्पद प्रस्ताव भले लगता हो मगर इसके अर्थ बेहद आकर्षक हैं। ऐसे वैज्ञानिक जो एलियन के टेक्नोसिग्नेचर को ढूंढना चाहते हैं और यह साबित करना चाहते हैं कि ब्रह्मांड में हम अकेले नहीं हैं उन्हें ही एम्बैड के सुझाव पर यकीन नहीं है। उन्हें लगता नहीं कि इन कम्पाउंडों के सहारे वह एलियन तकनीक को साबित किया जा सकता है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के एक खगोल विज्ञानी एडवर्ड श्वीटरमैन ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ये खनिज एलियनों की पुष्टि करते हैं। हालांकि यह सच है कि खनिजों को उनके तथाकथित आविष्कार के कुछ ही वर्षों बाद उल्कापिंडों में पाया गया था, लेकिन निराशाजनक रूप से बस यह सिर्फ एक संयोग है। श्वीटरमैन ने कहा कि खनिज हजारों-लाखों वर्षों से अंतरिक्ष में रहे हैं और संभवतः अंतरिक्ष मलबे के अनगिनत टुकड़ों में पाए जा सकते हैं।

25 सालों में एलियन ढूंढ़ने का किया दावा

25 सालों में एलियन ढूंढ़ने का किया दावा

एम्बैड की परिकल्पना एलियंस के अस्तित्व को साबित करने के लिए किसी भी तरह से जाती है या नहीं, यह देखा जाना बाकी है लेकिन इस बीच एक अंतरिक्ष विज्ञानी बोफिन का मानना है कि हम केवल 25 वर्षों के अंदर एक नए ग्रह पर जीवन की खोज करने में सफलता हासिल कर लेंगे। स्विट्जरलैंड के ईटीएच ज्यूरिख इंस्टीट्यूट के भौतिक विज्ञानी डॉ साशा क्वांज ने कहा कि उन्हें यकीन है वह सिर्फ एक चौथाई सदी में एलियनों को ढूंढ पाएंगे। हालांकि साशा क्वांज ने कहा, "सफलता की कोई गारंटी नहीं है। लेकिन हम रास्ते में कई शानदार चीजें सीखने जा रहे हैं।"

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