स्पेस में आदित्य L1 की तीसरी छलांग रही कामयाब, पृथ्वी से कितनी दूर पहुंचा?
इसरो का आदित्य L1 यान बहुत ही शानदार ढंग से काम कर रहा है। उसने रविवार को पृथ्वी के चारों ओर घूमते हुए तीसरी बार ऑर्बिट बदली। अगले कुछ दिनों तक वो इसी ऑर्बिट में घूमेगा, इसके बाद चौथी बार ऑर्बिट बदलकर सूर्य की ओर बढ़ेगा।
इसरो ने आदित्य L1 के स्वास्थ्य को लेकर भी अपडेट दिया है। अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक यान ने तीसरा अर्थ बाउंड मैन्यूवर (EBM 3) पूरा कर लिया है। उसके सभी उपकरण सही ढंग से काम कर रहे।

नए ऑर्बिट चेंज के बाद अब वो 296 km x 71767 km की अंडाकार कक्षा में पृथ्वी के चक्कर लगा रहा। अगले 4 दिन वो इसी कक्षा में चक्कर लगाता रहेगा, इसके बाद 15 सितंबर की रात 2 बजे वो चौथी बार ऑर्बिट (EBM 4) बदलेगा। इसके बाद वो लॉरेंज पॉइंट की ओर बढ़ेगा।
वहीं आदित्य अब पृथ्वी से 72 हजार किलोमीटर दूर पहुंच गया है। अभी भी उसे 14 लाख किमी से ज्यादा की दूरी तय करनी है। इसमें करीब चार महीने का वक्त लगेगा। एल1 पर पहुंचने के बाद वो वहां पर स्थापित हो जाएगा, इसके अब वहीं से सूर्य का अध्ययन करेगा।
इसरो के मुताबिक सूर्य के अध्ययन के लिए आदित्य में कुल 7 पेलोड लगाए गए हैं, जो भारत में ही बने हैं। एक बार जब वो अपने गंतव्य तक पहुंच जाएगा, तो रोजाना 1440 तस्वीरें भेजेगा। इसकी मदद से वैज्ञानिक सूर्य का अध्ययन करेंगे। अगर सब कुछ सही रहा तो ये मिशन 5 साल तक काम करेगा।
हाल ही में भेजी थी सेल्फी
आदित्य यान ने हाल ही में हजारों किमी दूर से पृथ्वी और चांद की फोटो भेजी थी। इसके अलावा उसने एक सेल्फी भी भेजी थी, जिसमें उसके पेलोड दिख रहे थे। इसरो के मुताबिक ऑन बोर्ड कैमरा और पेलोड सुरक्षित हैं।
ट्रैकिंग के लिए खास इंतजाम
आदित्य एल1 पृथ्वी से काफी दूर जा रहा, ऐसे में इसको ट्रैकिंग के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। इसरो के मुताबिक मॉरशिस, बेंगलुरु के ISTRAC, श्रीहरिकोटा के SDSC-SHAR और पोर्ट ब्लेयर से इसकी निगरानी की जा रही है।
क्या कर रहा चंद्रयान-3?
वहीं दूसरी ओर चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर ने अपना मिशन पूरा कर लिया है। वो दोनों स्लीप मोड में चले गए। अब उनसे कोई कॉन्टैक्ट नहीं है। इसरो के मुताबिक चांद पर अभी रात है, लेकिन 22 सितंबर को वहां पर सूर्योदय होगा। ऐसे में दोनों को फिर से एक्टिव करने की कोशिश की जाएगी।












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