बेंगलुरु के इस्कॉन मंदिर में 29-30 अगस्त को मनाई जाएगी जन्माष्टमी, भक्तों को नहीं मिलेगी एंट्री

बेंगलुरू, 27 अगस्‍त। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में हर बार की तरह इस बार भी कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी के पर्व पर भव्‍य आयोजन किया जा रहा है, लेकिन कृष्‍ण भक्‍तों के लिए मायूसी भरी खबर ये हैं कि कोरोना के चलते इस बार मंदिर में जाकर दर्शन नहीं कर पाएंगे। शुक्रवार को इस्कॉन मंदिर बेंगलुरू के सामारिक संचार प्रमुख नवीन नीरदा दास ने ये जानकारी दी।

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उन्‍होंने बताया 29 और 30 अगस्त को जन्माष्टमी मनाने के लिए दोनों दिन कोई भक्‍तों को आने की परमीशन नहीं है। भक्त ऑनलाइन भाग ले सकते हैं।

बता दें दुनिया भर में 400 इस्‍कॉन हैं जिसमेंबैंगलोर का इस्कान मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा इस्कान मंदिर हैं। इस्‍कॉन मंदिर का पूरा नाम International Society for Krishna Consciousness है हिंदी में इसे अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ या इस्कान के नाम से जाना जाता है। दुनिया भर में वर्तमान समय में लाखों की संख्‍या में अनुयायी हैं।

सबसे पहले इस्‍कॉन मंदिर की स्‍थापना श्रीमूर्ति श्री अभयचरणारविन्द भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपादजी ने सन् 1966 में न्यूयॉर्क में की थी। उन्‍होंने पूरे विश्व में भगवान कृष्ण के संदेश को पहुंचाने के लिए इस मंदिर की स्थापना की थी। महज 55 वर्ष की उम्र ने उन्‍होंने सांसरिक जीवन त्‍यागकर संन्‍यास ले लिया था और दुनिया भर में हरे रामा, हरे कृष्‍णा का प्रचार-प्रचार किया। इस्‍कॉन अनुयायियों में हजारों की संख्‍या में विदेशी भी हैं। जिन्‍होंने अपना पूरा जीवन भगवान कृष्‍ण की भक्ति के लिए समर्पित कर दिया है।

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