चुनावों से परेशान और लश्‍कर और ISI हमले तेज करने की कोशिश में!

श्रीनगर। शुक्रवार को एक के बाद एक हुए आतंकी हमलों से पूरी कश्‍मीर घाटी दहल गई थी। इन हमलों के जरिए आतंकियों का मकसद देश की सरकार को एक संदेश देना कि वह भले ही राज्‍य में हो रहे चुनावों से दुखी हों लेकिन अभी टूटे नहीं हैं। घाटी में उनके मंसूबे अभी भी कामयाब होने की ताकत रखते हैं।

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सरकार को देना चाहते हैं एक संदेश

आईबी के अधिकारियों की ओर से वनइंडिया को जो जानकारी दी गई है उसके मुताबिक इन हमलों का मकसद आतंकी संगठन लश्‍कर-ए-त‍ैयबा को संगठित रखना था। इसके अलावा आठ दिसंबर को पीएम मोदी की रैली के तहत यह संदेश भी भारत की सरकार को देना था कि लोकतंत्र कभी भी कश्‍मीर में सफल नहीं हो सकता है।

सिर्फ लश्‍कर के भरोसे आईएसआई

कश्‍मीर पर अब सिर्फ पाकिस्‍तान के आतंकी संगठन ही अपना दावा नहीं जता रहे हैं। बल्कि आईएसआईएस और अल कायदा भी कश्‍मीर के मुद्दे को कई बार उठा चुके हैं। यही वह बात है जो लश्‍कर और आईएसआई को चुभ रही है।

आईएसआई के लिए लश्‍कर इसलिए सबसे अहम है क्‍योंकि संगठन हमेशा से ही आईएसआई के मुताबिक ही काम करता आया है। संगठन आईएसआईए के लिए काफी वफादार रहा है।

लश्‍कर और आईएसआई के साथ आने के बाद तहरीक-ए-तालिबान और एक्‍यूआईएस दोनों ही इस बात पर यकीन करने लगे हैं कि कश्‍मीर मुद्दे को अकेले नहीं लड़ा जा सकता है और इसके लिए राजनीतिक मकसद का होना काफी अहम है।

26/11 की तरह ही आईएसआई की ओर से लश्‍कर को घाटी में हिंसा फैलाने के लिए ग्रीन सिग्‍नल दे दिया है। अब जबकि घाटी पर दूसरे संगठन भी अपना हक जताने लगे हैं तो लश्‍कर के साथ ही साथ आईएसआई की भी चिंताएं बढ़ गई हैं। इसी वजह से आईएआई ने घाटी में शुक्रवार ही तरह हमले करते रहने का फैसला कर लिया है ताकि वह आतंकियों को संतुष्‍ट और खुश रख सके।

शुक्रवार को उरी में सेना के कैंप पर जो हुआ है, अगर सेना और पुलिस ने आतंकियों का मुंहतोड़ जवाब न दिया होता तो फिर कम से कम तीन दिन तक लड़ाई चलती। आतंकियों के पास से मिले हथियार और खाने का सामान तो कम से कम इसी ओर से इशारा करता है कि वह लंबी लड़ाई के लिए तैयार होकर आए थे।

15 दिन पहले ही घाटी में पहुंचे आतंकी

आंतकियों का इरादा सेना को तीसरे दौर के चुनाव की तारीख यानी नौ दिसंबर तक इसी लड़ाई उलझाकर रखना था। इस बात में भी अब कोई शक नहीं है कि आतंकियों को पाकिस्‍तान की सेना का पूरा समर्थन हासिल था।

आतंकियों के पास जो भी सामान मिला है उससे तो यही लगता है कि पाक सेना ने इन आतंकियों को सारा सामान मुहैया कराया था।

सूत्रों की मानें तो आतंकी 15 दिन पहले ही घाटी में आ गए थे। उन्‍होंने हमले के लिए कोई तारीख तय नहीं कर रखे थे लेकिन ऐसा लगता है कि मोदी की घाटी में होने वाली रैली और चुनावों की तारीख के समय ही उन्‍होंने इस हमले का प्‍लान तैयार कर लिया था।

सेना की ओर से भी इस बात पर मोहर लगाई जा चुकी है कि इन हमलों को लश्‍कर की ओर से अंजाम दिया गया है। इसके अलावा पाक सेना की ओर से भी इसमें पूरा सहयोग दिया गया। पाक सेना ने आतंकियों को ट्रेनिंग दी थी।

इसके अलावा आईएसआई ने उन्‍हें इंटेलीजेंस से जुड़ी हर छोटी से छोटी जानकारी मुहैया कराई।

अभी और बढ़ेंगे हमले

आईबी को जो इनपुट्स हासिल हुए हैं उनके मुताबिक आईएसआई ने उरी की ही तरह कुछ और हमले करने की योजना तैयार की है। यहां तक कि हाफिज सईद की ओर से भी आईएसआई को आदेश दिया गया है कि घाटी में लड़ाई को और बढ़ाना पड़ेगा।

पाक सेना और आईएसआई के साथ हाफिज सईद की मीटिंग तीन माह पहले हुई थी। इस मीटिंग में जो बात उभरकर सामने आई उसके मुताबिक घाटी में अब लोगों में वह डर नहीं है जो पहले था।

घाटी में स्‍थानीय लोगों का समर्थन हासिल करने के लिए लश्‍कर और आईएसआई दोनों ही बेचैन हैं। स्‍थानीय लोग आतंकवाद से तंग आ चुके हैं और अब वह इस बात को महसूस करने लगे हैं कि पाक से आने वाले लोग सिर्फ झूठे वादे करते हैं। पाक कभी भी उन्‍हें आजादी नहीं दिला पाएगा। हालांकि इन सबसे अलग एक राजनीतिक खेल भी यहां पर खेला जा रहा है।

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