मोदी को 'ऑर्डर ऑफ जायद' का सम्मान देकर क्या पाकिस्तान को मिर्ची लगा रहा है UAE?

नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे वक्त में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की यात्रा पर हैं, जब जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। वहां के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री पूरी दुनिया को कभी अपनी लाचारी बता रहे हैं तो कभी युद्ध की गीदड़भभकी दे रहे हैं। पाकिस्तान की बस एक ही छटपटाहट है कि मुस्लिम बहुल कश्मीर पर भारत ने उसका खेल हमेशा-हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। उसे उम्मीद थी मुसलमानों के नाम पर कम से कम मुस्लिम देश उसके आंसू पोंछने के लिए आगे आएंगे। लेकिन, पाकिस्तान को समर्थन देना तो दूर यूएई जैसा मुस्लिम देश तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान से नवाज रहा है। खासकर इस सम्मान के लिए संयुक्त अरब अमीरात और भारत ने जो वक्त चुना है वह पाकिस्तान और इमरान खान के लिए उनके जख्मों पर नमक छिड़कने से कम नहीं है। बड़ी बात ये है कि बालाकोट एयरस्ट्राइक के दौरान भी मुस्लिम देशों ने पाकिस्तान को ऐसे ही झटका दे दिया था।

यूएई का सबसे बड़ा सम्मान है 'ऑर्डर ऑफ जायद'

यूएई का सबसे बड़ा सम्मान है 'ऑर्डर ऑफ जायद'

प्रधानमंत्री की इस बार की यूएई यात्रा बहुत ही खास है। पीएम मोदी को यूएई के सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'ऑर्डर ऑफ जायद' से सम्मानित किया जा रहा है। जाहिर है कि कश्मीर के मुद्दे पर बिदके पाकिस्तान के लिए किसी मुस्लिम देश की ओर से दिया जा रहा इतना बड़ा सम्मान आसानी से पचना संभव नहीं है। हालांकि, यूएई ने पीएम मोदी को अपने सबसे बड़े सम्मान देने का ऐलान पिछले अप्रैल में ही कर दिया था। बड़ी बात ये भी है कि मोदी को यह सम्मान तब दिया जा रहा है जब यूएई अपने संस्थापक शेख जायद बिन सुल्तान अल नाहयान का जन्म शताब्दी वर्ष मना रहा है और यह उन्हीं के नाम पर दिया भी जाता है। यहां यह भी बता देना जरूरी है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह तीसरी यूएई यात्रा है।

कश्मीर मुद्दे पर दिया है भारत का साथ

कश्मीर मुद्दे पर दिया है भारत का साथ

जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर यूएई पाकिस्तान का साथ देने के लिए तैयार नहीं है। हाल ही में भारत में वहां के राजदूत अहमद अल बन्ना को जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के भारत फैसले में कुछ भी गलत नहीं लगा। उन्होंने इसे पूरी तरह से भारत का अंदरूनी मामला बताया था। संयुक्त अरब अमीरात कश्मीर में भारत की ओर से उठाए गए कदमों को इलाके की विसंगतियों को दूर करने के लिए उठाया गया कदम मानता है। गौरतलब है कि मोदी के कार्यकाल के दौरान यूएई के साथ भारत के रिश्ते बहुत गहरे हुए हैं। तभी फरवरी 2018 में पीएम मोदी विश्व सरकार शिखर सम्मेलन में चीफ गेस्ट बनकर यूएई गए थे और 2017 के गणतंत्र दिवस समारोह में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान मुख्य अतिथि बनकर आए थे। सिर्फ यूएई ही नहीं कश्मीर मुद्दे पर एक और मुस्लिम देश सऊदी अरब भी भारत का खुलकर साथ दे रहा है।

बहरीन में 200 साल पुराने मंदिर का करेंगे जीर्णोद्धार

बहरीन में 200 साल पुराने मंदिर का करेंगे जीर्णोद्धार

यूएई ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी के एक और मुस्लिम बहुल देश बहरीन की यात्रा भी पाकिस्तान को खटक सकती है। क्योंकि, पीएम मोदी बहरीन पहुंचने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। बड़ी बात ये है कि जब पाकिस्तान कश्मीरी मुसलमानों के नाम का रोना रो रहा है, तब पीएम मोदी वहां कृष्णाष्टमी के अवसर पर 200 साल पुराने भगवान श्री कृष्ण के मंदिर के विकास को नया रूप देने की शुरुआत करेंगे। इस काम पर करीब 42 लाख अमेरिकी डॉलर खर्च होने का अनुमान है। इस मौके पर मनामा स्थित श्रीनाथजी मंदिर में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। नए सिरे से विकास के बाद श्रीनाथजी मंदिर के क्षेत्र का विस्तार 45,000 वर्ग फीट में हो जाएगा, जिसमें मौजूदा क्षमता से 80 प्रतिशत श्रद्धालु एक साथ भजन-कीर्तन कर सकेंगे।

इस्लामिक सहयोग संगठन में भी भारत को बुलावा

इस्लामिक सहयोग संगठन में भी भारत को बुलावा

इसी साल जब बालाकोट एयरस्ट्राइक को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चल रहा था, तब यूएई ने अबू धाबी में आयोजित हो रहे इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) में भारत को विशेष सम्मानित अतिथि के रूप में बुलाने के लिए वीटो लगा दिया था। तब पाकिस्तान के साफ मना करने के बावजूद तत्कालीन भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज वहां पहुंचीं और पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी की गैर-मौजूदगी में ओआईसी के सदस्यों को संबोधित किया। गौरतलब है कि ओआईसी बहरीन, पाकिस्तान, यूएई, सऊदी अरब समेत 47 मुस्लिम बहुल देशों का संगठन है, जो संयुक्त राष्ट्र के बाद दूसरा सबसे बड़ा अलग-अलग देशों के सरकारों का संगठन है। लेकिन, दुनिया की तीसरी बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश होने के बावजूद भारत न तो इसका सदस्य है और न ही ऑब्जर्वर।

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