क्या पटना साहिब से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने के संकेत दे रहे हैं बीजेपी के 'शत्रु'?
नई दिल्ली- बीजेपी में रहकर पार्टी और मोदी सरकार की नीतियों की ऐसी की तैसी करते रहे शत्रुघ्न सिन्हा की ओर से जो संकेत मिल रहे हैं, उससे लगता है कि उनकी नए राजनीतिक ठिकाने की तलाश लगभग पूरी हो चुकी है। क्योंकि, अब उन्होंने ऐलान कर दिया है कि 'सिचुएशन कुछ भी हो, लोकेशन वही' होगी। यानी वो इसबार भी पटना साहिब लोकसभा सीट से ही चुनाव लड़ेंगे। उन्हें पता है कि बीजेपी में रहकर बीजेपी का उन्होंने जो हाल किया है, उसके बाद वो किस मुंह से अपनी मौजूदा पार्टी से टिकट मांगेंगे? मतलब साफ है कि किसी पार्टी ने उनकी ही सीट से उन्हें उतारने का भरोसा दे दिया है और वर्तमान परिस्थितियों में वो पार्टी कांग्रेस या आरजेडी ही हो सकती है।

कायस्थ मतदाताओं के भरोसे शत्रुघ्न
पटना साहिब सीट से जहां से दो बार वो बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीत कर आए हैं, वह कायस्थों के दबदबे वाली सीट है। कायस्थों के बाद वहां यादव और राजपूत मतदाताओं का बोलबाला है। पिछले दो चुनावों से वहां कांग्रेस के उम्मीदवार ही उन्हें टक्कर देते रहे हैं। इसलिए इसबार भी संभावना है कि महागठबंधन की ये सीट कांग्रेस के खाते में ही जाने वाली है।
कायस्थ मतदाताओं का झुकाव आमतौर पर तो बीजेपी के पक्ष में रहता है, लेकिन कांग्रेस से शत्रुघ्न के उतरने पर यहां मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। यही वजह है कि शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा है कि 'सिचुएशन कुछ भी हो, लोकेशन वही' होगी।
अटकलें तो यहां तक हैं कि उन्हें कांग्रेस में लाने की बात पक्की हो चुकी है और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद इसका ऐलान हो सकता है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस नेता सुबोधकांत सहाय उनको पार्टी में लाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।

'लालटेन' की जगह 'हाथ' थामना क्यों है आसान?
कांग्रेस से चुनाव मैदान में आने के बाद शत्रुघ्न को गठबंधन के तहत यादव मतदाताओं का भी समर्थन मिलना तय है। इसलिए राहुल गांधी के लिए वो शायद पहली पसंद हों। जबकि, इसके ठीक उलट अगर ये सीट आरजेडी के खाते में जाती है और शत्रुघ्न सिन्हा लालटेन थामते हैं, तो कायस्थ वोटरों को अपने पक्ष में लाना उनके लिए आसान नहीं होगा।
सबसे बड़ी बात कि गठबंधन होने या न होने दोनों ही सूरत में इस सीट पर 2009 और 2014 दोनों ही बार यहां कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही थी। इसलिए इस बात की कम ही संभावना है कि गठबंधन के तहत ये सीट आरजेडी के खाते में जाए।

बीजेपी से टिकट मिलना मुश्किल
रविवार को गांधी मैदान में मोदी,नीतीश और रामविलास के एनडीए गठबंधन की संकल्प रैली से पटना साहिब के सांसद का गायब रहना, कई अटकलों पर विराम लगा देता है। भले ही पार्टी औपचारिक घोषणा नहीं कर रही हो, लेकिन ये तय है कि उस सीट से शत्रुघ्न सिन्हा को बीजेपी से टिकट मिलना लगभग नामुमकिन है।
चर्चा है कि पार्टी वहां केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद या राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा को चुनाव लड़ा सकती है। जो भी हो ये तय है कि बीजेपी इस परंपरागत सीट को हर हाल में जीतना चाहेगी।
मौजूदा समय में इस लोकसभा क्षेत्र के छह में से पांच विधानसभा सीटों पर भी बीजेपी का कब्जा है। इसलिए, बीजेपी से टिकट नहीं मिलने पर शॉटगन के लिए कांग्रेस के साथ जाना ज्यादा बेहतर विकल्प लग रहा है।

पटना में रैली की तैयारी छोड़कर रांची में लालू से मिल रहे थे
जब बिहार बीजेपी के सारे नेता और कार्यकर्ता पीएम मोदी की रैली को सफल बनाने की तैयारियों में जुटे हुए थे, तब उस क्षेत्र के सांसद बीजेपी के राजनीतिक विरोधी लालू यादव की सेहत का हाल जानने के लिए रांची में मौजूद थे। कई मौकों पर शत्रुघ्न सिन्हा खुद को लालू के पारिवारिक मित्र बताते रहे हैं।
वहीं पर उनकी सुबोधकांत सहाय के साथ भी चर्चा की अटकलें हैं। जाहिर है कि अगर कांग्रेस उन्हें पटना साहिब से उम्मीदवार बनाएगी, तो उनकी जीत का रास्ता लालू-राबड़ी के सियासी दरबार से होकर ही सुनिश्चत होगा। क्योंकि, बिहार में भले ही दोनों पार्टियों के चुनाव चिन्ह अलग हैं, लेकिन हर राजनीतिक मौके पर उनकी आपसी समझदारी बहुत अच्छी रही है।

एसपी से लड़ने की थी अटकलें
हाल ही में मीडिया में खबरें उछली थी कि बिहारी बाबू समाजवादी पार्टी के टिकट में वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती दे सकते हैं। दरअसल ये कयास उनके अखिलेश यादव की शान में कसीदे पढ़ने के बाद लगाए जा रहे थे। लेकिन, खुद शत्रुघ्न सिन्हा को पक्का इल्म है कि काशी में मोदी के सामने टिकना उनके लिए आसान नहीं होगा।
इसलिए वो बार-बार जोर देकर पटना साहिब को ही अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बताने की कोशिश कर रहे हैं। जहां से 2019 में वो बीजेपी के 'कमल' का त्याग कर शायद कांग्रेस का 'हाथ' थामे 'लालटेन' की रोशनी में लोकसभा पहुंचना चाह रहे हैं।
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