क्या एनसीपी के राजनीतिक भविष्य को लेकर हताश होते जा रहे हैं शरद पवार?

पिछले महीने की शुरुआत में जब से महाराष्ट्र में एनसीपी में टूट हुई है, पार्टी के संस्थापक शरद पवार के बयानों में एक अजीब सी निराशा महसूस होने लगी है। गुरुवार को मराठवाड़ा के बीड में उन्होंने अपने गुट की एक जनसभा में जो कुछ कहा है और उससे पहले भी जो कुछ कह चुके हैं, उसमें यह भाव स्पष्ट नजर आता है।

बीड अजित पवार के साथ गए पार्टी एमएलए और सीएम एकनाथ शिंदे सरकार में मंत्री बने धनंजय मुंडे का चुनाव क्षेत्र है। यहां जनसभा के माध्यम से शरद पवार ने भतीजे और राज्य के डिप्टी सीएम अजित पवार और उनके साथ गए नेताओं को एक तरह से यह संदेश देने की कोशिश की कि जिन्होंने सियासत सिखाई कम से कम उसके प्रति तो बर्ताव नहीं बदलना चाहिए।

sharad pawar on ncp

'जिसने सबकुछ सिखाया.....': शरद पवार
सीनियर पवार ने बिना भतीजे या किसी अन्य नेता का नाम लिए कहा, 'अगर आप किसी सरकार में शामिल होना चाहते हैं तो होइए, लेकिन कम से कम उस व्यक्ति के प्रति मानवीय बने रहिए, जिसकी वजह से आपको सफलता मिली है। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो जनता आपको सबक सिखाएगी।' पवार ने कहा कि 'जिन्होंने उन्हें सबकुछ सिखाया' उन्हें उनको नहीं भूलना चाहिए।

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'बीजेपी के खिलाफ लड़े और उसी के साथ चले गए'
पवार ने बीजेपी-शिवसेना सरकार में शामिल होने वाले एनसीपी एमएलए को लेकर कहा कि चुनावों में उन्हें हार मिलेगी। उन्होंने कहा, 'आपने बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़कर जीत दर्ज की थी। लोगों ने आपको बीजेपी के खिलाफ वोट दिया था; अब आप बीजेपी की सरकार में शामिल हो गए। आने वाले चुनावों में लोग आपके खिलाफ वोट डालकर आपको आपकी जगह दिखा देंगे।'

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बीड में भी पोस्टर में भतीजे के साथ दिखे पवार
गौरतलब है कि जिस जगह पर पवार भाषण देने पहुंचे थे, उसी के नजदीक उनके स्वागत में कुछ पोस्टर-बैनर लगाए गए थे, जिसपर उनके साथ अजित पवार की भी तस्वीरें लगाई गई थीं। एनसीपी से मिल रहे ऐसे ही दुविधाजनक संकेतों ने कांग्रेस और उद्धव गुट की शिवसेना को भी आशंकित कर रखा है। हालांकि, दो दिन पहले शरद पवार अपनी पार्टी का हाल भी उद्धव ठाकरे की पार्टी जैसे होने की आशंका जता चुके हैं।

उद्धव ठाकरे जैसा हाल होने की जता चुके हैं आशंका
उन्होंने कहा भी था, 'मैं इलेक्शन कमीशन की वजह से चिंतित नहीं हूं, लेकिन यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार के कुछ पावरफुल लोगों ने उद्धव ठाकरे की पार्टी पर भारतीय चुनाव आयोग के फैसले में दखल दिया था।......मुझे संदेह है कि हमारे साथ भी वैसा ही हो सकता है।' बता दें कि एनसीपी के नाम और चुनाव निशान का मामला चुनाव आयोग में लंबित है और उसने नोटिस जारी कर दोनों पक्षों को 8 सितंबर तक जवाब देने को कह रखा है।

अजित पवार गुट के साथ सुलह की भी कोशिशें हुई हैं
पिछले महीने जब अजित पवार खुद को असली एनसीपी के नेता के रूप में प्रोजेक्ट करके बीजेपी-शिवसेना सरकार में शामिल हुए थे, तो उनके चाचा के गुट की ओर से बहुत ही कड़े तेवर दिखाए गए थे। लेकिन, उसके बाद सहयोगी दलों के भारी विरोध के बावजूद शरद पवार के तेवर नरम पड़ने लगे और उनसे कई दफे औपचारिक और अनौपचारिक मुलाकात भी कर चुके हैं। दोनों गुटों में सुलह की कोशिशें भी हुई हैं।

क्यों हताश होते जा रहे हैं शरद पवार?
खुद शरद पवार कह चुके हैं कि उनके शुभचिंतक चाहते हैं कि वह अपना स्टैंड बदल लें। इसलिए वे भी सौहार्दपूर्ण बातचीत में शामिल होते हैं। जबकि, उनके इस ढुलमुल नीति को उनके सहयोगी 'ढोंग' तक कह चुके हैं। दूसरी तरफ अजित गुट का दावा है कि उन्होंने जो भी स्टैंड लिया है, उसे पूरी तरह से जनप्रतिनिधित्व कानून के दायरे में लिया है। अब दोनों गुटों को चुनाव आयोग में सबूत देने हैं कि असली एनसीपी किसके साथ है। इसी को लेकर शरद पवार आशंकित नजर आ रहे हैं।

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