डेल्टा से कितना खतरनाक है ओमिक्रॉन? एक्सपर्ट ने नए वैरिएंट को लेकर बताई बड़ी बात
नई दिल्ली, 15 दिसंबर: कोरोना वायरस के नए वैरिएंट 'ओमिक्रॉन' ने दुनियाभर में चिंताओं को बढ़ा दिया है। पहली बार दक्षिण अफ्रीका में पहचाने गए 'ओमिक्रॉन ' वैरिएंट आनुवांशिक कोड के कारण अभी तक खोजे गए सार्स-कोव-2 स्ट्रेन का सबसे शक्तिशाली वेरिएंट है। डेल्टा वैरिएंट के बाद कोरोना के इस नए वैरिएंट के सबसे अधिक संक्रामक होने की जानकारी सामने आई है। कुछ देशों में इसके संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस पर सवाल उठ रहा है कि, क्या ओमिक्रॉन डेल्टा वैरिएंट से अभी अधिक भयावह है।

क्या डेल्टा से भी बुरे हालात पैदा कर देगा ओमिक्रॉन
जवाहर लाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के निदेशक डॉ. राकेश अग्रवाल का कहना है कि, कोरोना वायरल का 'ओमिक्रॉन' वैरिएंट बहुत तेजी से फैलता है लेकिन अब तक यह बहुत गंभीर बीमारी का कारण नहीं बना है। हमें सतर्क रहने और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए मास्क पहनने, भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचने जैसी सावधानियां बरतने की जरूरत है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि इस पर टीकाकरण के क्षेत्र के विशेषज्ञ नजर रखे हुए हैं। अब तक, ऐसा प्रतीत होता है कि देश में बूस्टर की ज्यादा भूमिका नहीं है क्योंकि हमारी आबादी का एक बड़ा हिस्सा वायरस के संपर्क में था और टीके भी ले चुका है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस ए घेब्रेयसस ने कहा है कि ओमिक्रॉन की वजह से अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या और मृत्यु दर में तेजी आएगी। ये अधिकांश देशों में फैल चुका है, भले ही इसका पता नहीं चला हो।

डेल्टा वैरिएंट की तुलना में कितना खतरनाक है ओमिक्रॉन
यह कोरोना वायरस का नया वैरिएंट को ओमिक्रोन (B.1.1.529) नाम दिया गया है। इस वैरिएंट के कुल 50 तरह के म्यूटेशन है। इसमें 30 स्पाइक प्रोटीन है। वैरिएंट की यह खासियत उसको अधिक संक्रामक और खतरनाक बनाती है। चिंता की बात वैरिएंट के 50 म्यूटेशन है। विश्व स्थ्वास्थ्य संगठन ने इसे डेल्टा वैरिएंट से ज्यादा खतरनाक बताया है। ओमिक्रॉन की अनूठी जेनेटिक संरचना स्पाइक प्रोटीन में कई बदलावों का अनुवाद करती है, जो इसे वर्तमान टीकों के माध्यम से अधिक संक्रामक और नियंत्रित करने के लिए कठिन बना सकती है, लेकिन ये संभावनाएं अब तक सैद्धांतिक हैं।
डेल्टा वैरिएंट वर्तमान में दुनिया भर में सबसे अधिक फैला हुआ है। डेल्टा (म्यू और लैम्ब्डा) के बाद विकसित होने वाले स्वाभाविक रूप से प्रतिस्पर्धी वेरिएंट ओमिक्रॉन फिलहाल लोगों में तेजी से नहीं फैला है, लेकिन दक्षिण अफ्रीका के गौटेंग में फैल रहे ओमिक्रॉन से यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि यह जल्द बड़ी आबादी में फैल सकता है। फ्रांसीसी वायरोलॉजिस्ट ब्रूनो कैनार्ड के मुताबिक, यदि ओमिक्रॉन बहुत संक्रामक है, लेकिन गंभीर कोविड (और अस्पतालों में भर्ती होने की नौबत नहीं आती) का कारण नहीं बनता है, तो यह ग्रुप इम्यूनिटी प्रदान कर सकता है और सार्स कोव-2 को एक सौम्य मौसमी वायरस बनाने में योगदान कर सकता है, जो संकट को समाप्त करने में मदद करेगा।
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ओमिक्रॉन और डेल्टा में मुख्य अंतर
कोरोना के डेल्टा वैरिएंट और ओमिक्रॉन में मुख्य अंतर की बात करें तो इतन दोनों से सबसे बड़ा अंतर इनकी संक्रामक दर है। ओमिक्रॉन डेल्टा वैरिएंट की तुलना में तेजी से फैलता है। ओमिक्रॉन डेल्टा के मुकाबले 5 गुना तक संक्रामक है। इनके बीच का दूसरा मुख्य अंतर यह है कि, बीमारी की गंभीरता है, ओमिक्रॉन डेल्टा की तुलना में कम घातक बताया जा रहा है। अमेरिका के इंफेक्शियस डिसीज एक्सपर्ट डॉ. एंथॉनी फाउची ने कहा कि ओमिक्रॉन निश्चित रूप से डेल्टा से ज्यादा खतरनाक नहीं है। उन्होंने कहा, 'ओमिक्रॉन पिछले वैरिएंट्स की तुलना में कम खतरनाक हो सकतता है। अगर आप दक्षिण अफ्रीका की तरफ नजर घुमाएं तो देखेंगे कि वहां संक्रमितों की संख्या और अस्पताल में दाखिल होने वाले मरीजों की संख्या का अनुपात डेल्टा की तुलना में कम है।

ओमिक्रोन वैरिएंट के लक्षण
कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट में डेल्टा की तरह की लक्षण दिखाई देते हैं। दोनों वैरिएंट के लक्षणों में वैसो को कई खास अंतर नहीं है। ओमिक्रोन से संक्रमित व्यक्ति में हल्के से मध्यम लक्षण ही दिखाई दे रहे हैं। इस कारण इसकी पहचान करना मुश्किल साबित हो रहा है। इससे संक्रमित व्यक्ति में संक्रमित पाए गए लोगों को बदन दर्द, तेज सिरदर्द और थकान की शिकायत सामने आई है। इसके वेरिएंट में 30 से अधिक म्यूटेशन मिले हैं जिससे हल्के से मध्यम लक्षण दिखाई दे रहे हैं। ओमिक्रोन वेरिएंट में बहुत से लोगों को गले में खराश की समस्या हो रही है. बहुत से लोगों में स्क्रेची थ्रोट की समस्या भी देखी जा रही है। इसके अलावा किसी में गंध और स्वाद चले जाने, नाक बंद होने या बुखार की शिकायत नहीं देखी गई। जबकि डेल्टा में ये यही सबसे अहम लक्षण थे।

क्या वैक्सीन इस पर असरदार है?
विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही वैरिएंट टीकों की प्रभावशीलता को सीमित करता है, लेकिन यह संभवतः टीकों द्वारा प्रदान की जाने वाली सुरक्षा को पूरी तरह से नष्ट नहीं कर सकता है। डब्ल्यूएचओ की साउथ ईस्ट एशिया की निदेशक डॉक्टर पूनम खेत्रपाल ने कहा कि ओमिक्रॉन के मामले जिस तरह से बढ़ रहे हैं, मात्र वही स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लिए भारी मांग खड़ी कर सकते हैं। वैक्सीन संक्रमण होने की संभावना को कम करती है। हालांकि ये जरूरी नहीं कि वैक्सीन संक्रमण को पूरी तरह से रोक दें। यह कहना जल्दबाजी होगी कि वैक्सीन अन्य प्रकारों की तुलना में ओमिक्रॉन से संचरण या गंभीर बीमारी के खिलाफ कम प्रभावी होंगे।












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