आडवाणी ने की मोदी की तारीफ : भाजपा के मंच से और क्या करते?

अहमदाबाद। भारतीय जनता पार्टी के भीष्म लालकृष्ण आडवाणी ने छत्तीसगढ़ में नरेन्द्र मोदी की तारीफ क्या की, राजनीतिक पण्डितों ने कयास लगाने शुरू कर दिए, तो मीडिया आडवाणी के बयान में मोदी के लिए आशीर्वाद खोजने लगा। ऐसा होना स्वाभाविक व सहज भी था, क्योंकि जिस प्रकार गत 13 सितम्बर से लेकर कल तक आडवाणी का मोदी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी को लेकर नकारात्मक रुख रहा है, उसे देखते हुए आडवाणी अगर पूरा नरेन्द्र मोदी तो क्या केवल न या म भी बोलते, तो भी हाथोंहाथ लिया जाता।

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आडवाणी गत 13 सितम्बर को कोप भवन में चले गए थे, जब भाजपा संसदीय बोर्ड मोदी का नाम प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित कर रहा था। आडवाणी गोवा की तर्ज पर न केवल संसदीय बोर्ड में अनुपस्थित रहे, बल्कि पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के नाम नाराजगी भरा खत भी लिख डाला। इतना ही नहीं, कल राम जेठमलानी की पार्टी में भी मोदी और आडवाणी साथ होने के बावजूद दोनों में बड़ा फासला देखाय गया।

अब बात आज की करें। आज आडवाणी ने छत्तीसगढ़ के कोरबा में आयोजित भाजपा क जनसभा के दौरान मोदी की तारीफ की और राजनीतिक विश्लेषकों ने अपने-अपने मन मुताबिक मतलब निकाल कर आडवाणी के बयान में मोदी के लिए आशीर्वाद ढूँढने की कोशिश की, लेकिन सवाल यह उठता है कि आडवाणी करते भी क्या? छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के तहत चल रहे मुख्यमंत्री रमन सिंह के प्रचार अभियान के दौरान यदि आडवाणी उपस्थित थे और भाजपा के मंच से बोल रहे थे, तो क्या वे मोदी की आलोचना करते? सब जानते हैं कि आडवाणी के दिल को ठेस पहुँची है और यदि उनकी नाराजगी यूँ दूर हो जाने वाली होती, तो पार्टी के दिग्गज नेताओं को इस प्रकार उन्हें मनाने के लिए उनके घर कतार नहीं लगानी पड़ती।

वास्तविकता ये है कि आडवाणी जहाँ बोल रहे थे, वह कोई आम जगह नहीं थी, बल्कि पार्टी का मंच था। आडवाणी ऐसी जगह खड़े थे, जहाँ उनके लिए नरेन्द्र मोदी न निगले जा रहे थे न उगले। आडवाणी जब जनसभा को सम्बोधित करते हुए भाजपा सरकारों की प्रशंसा कर रहे थे, तो सीधी-सी बात है कि उनके पास मोदी की तारीफ करने के अलावा कोई चारा नहीं था। यदि वे केन्द्र की वाजपेयी सरकार की प्रशंसा करते हों, राज्यों में शिवराज और रमन सिंह की सरकार की तारीफों के पुल बांध रहे हों और गुजरात या नरेन्द्र मोदी का नाम न लें, तो मीडिया या पार्टी छोड़ती उन्हें? नाम नहीं लेते, तो भी नहीं चलता और नाम लिया, तो लाइव भी तो हुए। एक औपचारिकता ही कहलाएगी यह और जरूरत भी। इसमें यह मान लेने का कोई कारण नहीं है कि आडवाणी मान गए हैं।

हालाँकि आडवाणी के इस भाषण में एक सकारात्मक बिन्दु भी था। आडवाणी ने अपने भाषण के दौरान मोदी का उल्लेख भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में किया, लेकिन इसके बावजूद इस तारीफ के पीछे भाजपा के मंच की मजबूरी से ज्यादा कुछ नहीं था।

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