Coronavirus:ईरान की दुनिया से गुहार, बेकसूरों की जान बचाने के लिए अमेरिकी 'दादागीरी' को नजरअंदाज करें
नई दिल्ली- कोरोना वायरस ने जिस तरह से ईरान में कहर बरपाया है, उसकी झलक अब वहां की सरकार की भाषा में साफ नजर आने लगी है। ईरान ने दुनिया भर के देशों को यह नसीहत दी है कि ये जानलेवा वायरस किसी भी राजनीतिक या भौगोलिक सीमाओं को नहीं देख रहा है। इसीलिए नैतिकता इसी में है कि इस समय अमेरिकी पाबंदियों क नजरअंदाज करें, ताकि वह इस वायरस से निपट सके और बेकूसर ईरानी नागरिकों की जान बचा सके।
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ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने कहा है कि, 'किसी भी गुंडे द्वारा बेकसूरों की हत्या होने देना अनैतिक है। वायरस किसी भी राजनीतिक या भौगौलिक सीमाओं को नहीं देखता। इसीलिए कोरोना वायरस की स्थिति में हमें भी नहीं देखना चाहिए। '
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा है कि ईरानी राष्ट्रपति हसन रुहानी ने अपने समकक्षों को लिखे खत में इस बात की जानकारी दी है कि अमेरिकी पाबंदियों के चलते COVID19 महामारी से निपटने में ईरान को कितनी दिक्कतें हो रही हैं। उन्होंने उन सबसे गुजारिश की है कि इसका पालन करते हुए वो ईरान की मौजूदा परिस्थितियों का भी आंकलन जरूर करें।
इस बीच आपको बता दें कि ईरान में कोरोना वायरस के खौफ में जी रहे 234 भारतीयों को मोदी सरकार वापस स्वदेश लौटा लाने में कामयाब रही है। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया है कि इन भारतीयों में 131 स्टूडेंट और 103 श्रद्धालु शामिल हैं, जो ईरान में फंसे हुए थे। भारतीय विदेश मंत्री ने इसके लिए ईरान के अधिकारियों को धन्यवाद भी दिया है।

ईरान की हालत इतनी गंभीर है कि वहां के कई बड़े नेताओं को भी कोरोना वायरस पॉजिटिव पाया गया है, जिनमें वहां के सर्वोच्च धार्मिक नेता खोमैनी के सलाहकार भी शामिल हैं। इससे पहले ईरानी सरकारी टीवी ने शनिवार को बताया था कि 97 और लोगों की मौत के साथ वहां इस बीमारी से मरने वालों की संख्या 611 हो चुकी है, जबकि 12,700 से ज्यादा लोग इसकी चपेट में हैं।












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