Iran Donation Money: खामेनेई की मौत के बाद भारत में जुटाया गया मोटा चंदा क्यों ईरान नहीं जा सकता? क्या होगा?
Iran Donation Money Funds Stuck Reason: अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान जंग अपने पांचवें हफ्ते में दहशत बरपा कर रही है। आत्मघाती मिसाइल हमलों और बमबारी में ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई टॉप कमांडरों की मौत हो चुकी है। इंटरनेशनल रेड क्रॉस (IFRC) के अनुसार, अब तक 1900 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और 20,000 से अधिक घायल हैं।
इसी संकट के बीच भारत के शिया समुदाय ने ईरान के लिए अभूतपूर्व चंदा इकट्ठा किया। मेरठ के तीन भाइयों ने ₹15 लाख की जमीन दान कर दी। कश्मीर घाटी में लोगों ने सोना, नकद, निजी बचत और घर के बर्तन-जेवर बेचकर रकम जुटाई। मकसद था कि ईरान के जरूरतमंदों तक मदद पहुंचे और देश कमजोर न पड़े। लेकिन अब एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। जुटाए गए करोड़ों रुपये ईरान नहीं पहुंच पा रहे। आखिर क्यों अटक गया यह चंदा? सीधे तेहरान ट्रांसफर क्यों नहीं हो सका? और अब इन पैसों का क्या होगा? पूरी कहानी विस्तार से समझते हैं...

Iran Donation Money Funds: चंदा इकट्ठा करने की प्रक्रिया में आए बदलाव
भारत में ईरानी दूतावास ने युद्ध राहत के नाम पर चंदा अभियान चलाया। शुरू में 14 मार्च को दूतावास ने अपने मुख्य बैंक खाते से ही दान मांगा। लेकिन भारतीय नियमों के मुताबिक, विदेशी मिशनों को चंदा जुटाने के लिए अलग खाता खोलना जरूरी है।
इसलिए बाद में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में एक विशेष खाता खोला गया। 15 मार्च को एक दिन के लिए नकद दान का विकल्प भी दिया गया, मगर जल्द ही प्रक्रिया को पूरी तरह औपचारिक बना दिया गया। अब साफ निर्देश है कि सभी दान सिर्फ निर्धारित बैंक खाते से ही स्वीकार किए जाएंगे। नकद या अनौपचारिक तरीका पूरी तरह बंद।
Iran Donation Money Funds Stuck Reason: क्यों नहीं जा रहा पैसा ईरान? क्या है भारत का प्लान?
ईरानी दूतावास ने फैसला लिया है कि जुटाए गए पैसे को अब भारत में ही दवाएं खरीदने में लगाया जाएगा। भारत सरकार ने भी इसकी अनुमति दे दी है। मुख्य वजह है कि राजनयिक चैनलों से पैसा सीधे तेहरान ट्रांसफर करना संभव नहीं है। विदेश मंत्रालय (MEA) और RBI की सख्त बैंकिंग नियमों के चलते ऐसे फंड अक्सर भारत में ही फंस जाते हैं।
भारत पहले ही ईरान को दवाओं की एक खेप भेज चुका है। अब बाकी दवाएं दिल्ली के बाजार से खरीदकर एयरलिफ्ट की जाएंगी। ईरान की महान एयर का एक विमान मशहद से दिल्ली आने वाला था, लेकिन अमेरिकी हवाई हमले में एयरबेस पर क्षतिग्रस्त हो गया। ईरान अब नई उड़ान भेजने की तैयारी में है।
सोना-आभूषणों का क्या होगा?
कश्मीर समेत देश के कई हिस्सों से सोना और आभूषण चंदे के रूप में आए हैं। 'द प्रिंट' की रिपोर्ट के मुताबिक, इन आभूषणों को 'डिप्लोमैटिक पाउच' जैसे राजनयिक बैग से भी ईरान नहीं भेजा जा सकता। सूत्र बताते हैं कि इन वस्तुओं को स्थानीय बैंकों में जमा करके पहले नकदी में बदलना होगा। फिर वही बैंकिंग नियम लागू होंगे जो नकद चंदे पर हैं।

सोशल मीडिया पर भड़का विवाद
ईरानी दूतावास ने अपने अभियान को प्रमोट करने के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट किए। इनमें कश्मीरी दानदाताओं को धन्यवाद दिया गया और एक कश्मीरी महिला को सोना दान करते हुए दिखाया गया। पाकिस्तान स्थित कुछ अकाउंट्स के विरोध के बाद पोस्ट हटा लिए गए। इससे कश्मीर पर ईरान के रुख को लेकर तीखा विवाद खड़ा हो गया। दूतावास को भारी आलोचना झेलनी पड़ी।
राजनयिक और बैंकिंग नियमों का पेंच
'वियना कन्वेंशन ऑन डिप्लोमैटिक रिलेशंस' में विदेशी मिशनों द्वारा चंदा जुटाने का कोई स्पष्ट जिक्र नहीं है। दूतावासों को बैंकिंग सुविधा सिर्फ आधिकारिक कामों के लिए मिलती है।
नियम साफ हैं:
- मुख्य बैंक खाते से चंदा नहीं लिया जा सकता।
- MEA की अनुमति से अलग खाता खोलना जरूरी।
- RBI की कड़ी जांच के बाद ही पैसा स्वदेश भेजा जा सकता है।
अक्सर पैसा भारत में ही अटक जाता है। 2023 में सीरिया भूकंप के बाद भारत में जुटाए गए चंदे आज भी स्थानीय बैंक खातों में पड़े हैं। खामेनेई की मौत और जंग के इस संकट में भारत के शिया समुदाय ने दिल खोलकर मदद की। मेरठ से कश्मीर तक। लेकिन राजनयिक प्रोटोकॉल, सख्त बैंकिंग नियम और भू-राजनीतिक तनाव ने चंदे को ईरान पहुंचने से रोक दिया।
अब ये पैसे भारत में ही दवाओं में बदलकर एयरलिफ्ट किए जाएंगे। व्यावहारिक फैसला है, लेकिन कई दानदाता निराश जरूर हैं। विदेशी दूतावासों के चंदा अभियान का भविष्य भारत में हमेशा अनिश्चित रहता है। कभी मदद पहुंचती है, कभी बैंक खातों में फंस जाती है। इस बार ईरान ने जो रास्ता चुना, वह नियमों के दायरे में सबसे सुरक्षित और त्वरित है।












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