IPL स्‍पॉट फिक्सिंग: मुद्गल ने सर्वोच्च न्यायलय को सौंपी अंतिम रिपोर्ट

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के छठे संस्करण से जुड़े सट्टेबाजी और मैच फिक्सिंग मामले की जांच कर रही मुद्गल समिति ने सोमवार को अपनी अंतिम रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय को सौंप दी। इस समिति ने बीसीसीआई के प्रमुख एन श्रीनिवासन के साथ-साथ 12 अन्य लोगों के खिलाफ आरोपों की जांच की है। श्रीनिवासन अभी अंतराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के चेयरमैन हैं। समिति ने न्यायालय को बंद लिफाफों में अपनी रिपोर्ट पेश की। मामले की सुनवाई कर रही खंडपीठ के प्रमुख न्यायाधीश टीएस ठाकुर के सामने सीनियर वकील राजू रामचंद्रन ने रिपोर्ट पेश की।

Mudgal committee submits report
रामचंद्रन ने बाद में बताया कि इसकी अगली सुनवाई 10 नवंबर को की जाएगी। मामले से जुड़ी पिछली सुनवाई में खंडपीठ ने न्यायमूर्ति मुकुल मुद्गल की अध्यक्षता वाली समिति को मामले की जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त दो महीने का वक्त दिया था। यह मामला 2013 का है। इस मामले ने क्रिकेट जगत को हिलाकर रख दिया था। कई खिलाड़ी और अधिकारी इसकी चपेट में थे, जिनमें श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन भी हैं।

उल्लेखनीय है कि इस मामले का खुलासा पिछले साल दिल्ली पुलिस ने राजस्थान रॉयल्स के तीन खिलाड़ियों एस श्रीसंथ, अजीत चंदिला और अंकित चव्हाण को आधी रात में मुंबई से गिरफ्तार कर किया था। इसके बाद मुंबई पुलिस ने भी इस मामले में मयप्पन और बॉलीवुड अभिनेता विंदु दारा सिंह की गिरफ्तारी कर जांच को नया मोड़ दिया। पिछले साल अक्टूबर में इस मामले की पूरी जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व न्यायमूर्ति मुकुल मुद्गल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की।

समिति के अन्य सदस्य एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एल. नागेश्वर और वरिष्ठ अधिवक्ता निलय दत्ता हैं। इसके बाद मुद्गल समिति द्वारा इस संबंध में दो रिपोर्ट पेश करने के बाद न्यायालय ने मार्च में श्रीनिवासन को बीसीसीआई अध्यक्ष पद से निलंबित कर दिया। मुद्गल समिति ने फरवरी में एक बंद लिफाफे में 13 नामों की सूची भी सौंपी और कहा कि इनके बारे में और विस्तृत जांच की जानी चाहिए। अदालत ने तब अपने आदेश में श्रीनिवासन की जगह सुनील गावस्कर और फिर शिवलाल यादव को बीसीसीआई का अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया। साथ ही न्यायालय ने आईपीएल की कमान गावस्कर के हाथों में सौंपी।

मई में न्यायालय ने मुद्गल समिति को और अधिकार दिए और उन लोगों के बारे में जांच करने के लिए कहा, जिसे समिति ने बंद लिफाफे में अदालत को सौंपा था। मुद्गल समिति को अगस्त के आखिर में अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपनी थी। समिति ने हालांकि कुछ और वक्त की मांग की, जिसे न्यायालय ने स्वीकार करते हुए दो महीने का समय और दिया। इस दौरान न्यायालय ने श्रीनिवासन को दोबारा बीसीसीआई का अध्यक्ष बनाने की मांग को भी ठुकरा दिया। साथ ही न्यायालय ने कहा कि जांच जारी रहने तक श्रीनिवासन को बीसीसीआई का अध्यक्ष पद नहीं दिया जा सकता। ऐसे में अब सबकी नजर 10 नवंबर की तारीख पर टिकी है, जो क्रिकेट प्रशासक के रूप में श्रीनिवासन के भविष्य के लिए काफी अहम साबित हो सकता है। (आईएएनएस)

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