दंगा व रेप कैपिटल बने यूपी में कहां से हो कैपिटल इंवेस्टमेंट

यूं उत्तर प्रदेश के औद्योगीकरण को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने सभी प्रमुख क्षेत्रों के विकास का खाका तैयार किया, पर उस पर अमल किसी स्तर पर नहीं हुआ। निवेशकों को हर स्तर पर कठिनाई का सामना करना पड़ता है। कोई काम बिना पैसे के नहीं होता।
रीयल एस्टेट सलाहकार फर्म सैंचुरी 21 के चेयरमेन डा. देवेन्द्र गुप्ता कहते हैं कि हम तो नोएडा के आगे जाने से भी कतराते हैं। निवेश की तो बात ही मत कीजिए।
हालांकि 20 करोड़ की आबादी वाला हमारा राज्य देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है और प्राकृतिक संसाधनों के मामले में भी काफी समृद्ध है, इसके यहां बावजूद कायदे की औद्योगिक नीति नहीं बनी।
उधर, उत्तर प्रदेश में साम्प्रदायिकता की आग बुझने का नाम ही नहीं ले रही है। विगत 25 जुलाई के बाद से ही प्रदेश के अलग-अलग भागों में 600 से ज्यादा साम्प्रदायिक घटनाएं हुईं। मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे बड़े दंगों को समाजवादी पार्टी के आकाओं ने जातीय घटनाएं करार देकर अपना पल्ला झाड़ लिया। इसके अलावा बलात्कार के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं।
उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता विजय बहादुर ने कहा कि इन घटनाओं के पीछे सरकार की नीति,नीयत और कानून-व्यवस्था का बहुत बड़ा हाथ है।
प्रदेश में अपराधी सरकार के साथ मंच साझा करते नजर आ रहे हैं। इन हालातों में प्रदेश की आम जनता को अगले ढाई साल और समावजादी पार्टी का गुंड़ा राज झेलना पडेगा। जानकार मानते हैं कि उत्तर प्रदेश को चार भागों में बांटने से कानून -व्यवस्था पर काबू पाया जा सकेगा। हालांकि यह कोई सरल काम नहीं है।












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