मणीपुर में सेना पर हमला पूर्वनियोजित था, 70 आतंकी थे हमले के पीछे
नई दिल्ली। मणिपुर में शहीद हुए 18 भारतीय सेना के जवानों की जांच में बड़ा तथ्य सामने निकलकर आया है। जांच में पता चला है कि सेना के जवानों के खिलाफ यह हमला पूर्वनियोजित था और एक महीने पहले ही इसकी योजना बन चुकी थी।

आधुनिक लॉचर्स का हुआ था इस्तेमाल
इस हमले की जिम्मेदारी लेने वाले आंतकी संगठन युनाइटेट लिबरेशन फ्रंट के दावों से इस बात की पुष्टी होती है कि यह हमला पूर्व नियोजित था। इस हमले में आधुनिक रॉकेट लॉचर्स का इस्तेमाल किया गया था। यही नहीं इस हमले के पीछे 70 आतंकियों का हाथ था।
यही नहीं जांच में यह भी बात सामने निकलकर आयी है कि युनाइटे लिबरेशन फ्रंट ऑफ वेस्टर्न साउथ एशिया संगठन हाल ही में अस्तित्व में आया है। इस संगठन में उल्फा, एनएससीएन, एनडीएफबी के लोग भी शामिल हैं।
सेना के अभियान में तेजी से बौखलायें थे आतंकी
अभी तक की जांच में यह बात सामने निकलकर आयी है कि पिछले दिनों में जिस तरह से सेना ने आतंकियों के खिलाफ अभियान में तेजी लाया है तबसे सेना के खिलाफ इस हमले की योजना बनायी जा रही थी। सेना ने अपने अभियान में कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था और उसे पूरी तरह से खत्म कर दिया। यही नहीं सेना ने इन आतंकी संगठनों के संचार साधनों को भी बुरी तरह से ध्वस्त कर दिया था।
सेना के इस अभियान के बाद आतंकी संगठनों में गुस्सा काफी बढ़ गया था जिसके चलते कई आतंकी संगठन एकजुट होकर सेना के खिलाफ हमला करने की योजना बनायी। जिन रॉकेट लांचर से सेना के जवानों पर हमला किया गया था वो काफी उच्च गुणवत्ता के थे जोकि हमलों के वक्त इस्तेमाल किये जाते हैं।
स्थानीय लोगों की मदद मिल रही है आतंकियों को
माना जा रहा है कि म्यामांर सीमा से इन आतंकियों को हथियार की सप्लाई हो रही है। वहीं आईबी के अधिकारियों का कहना है कि इन आतंकियों को स्थानीय लोगों की मदद मिल रही है जिसके चलते ये ऐसे हमले करने में कामयाब होते हैं। अधिकारियों के अनुसार ये आतंकी स्थानीय लोगों को पैसे का लालच देकर जानकारियां हासिल करते हैं












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