पाक की नाक में दम करने वाला आईएनएस विक्रांत कबाड़खाने में

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यह प्रक्रिया इंडियन नेवी की ओर से सुबह 9:45 पर शुरू की गई। अब जब तक कि सुप्रीम कोर्ट आईएनएस विक्रांत से जुड़ी याचिका पर कोई फैसला नहीं दे देता यह जहाज उसी जगह पर रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की गई है उसके तहत मांग की गई है कि आईएनएस विक्रांत को एक म्यूजियम में बदल दिया जाए। अप्रैल माह में मुंबई की एक कंपनी आईबीसी प्राइवेट लिमिटेड ने आईएनएस विक्रांत को कबाड़ के तौर पर खरीदने के लिए 60 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी।
आईएनएस विक्रांत से सभी जरूरी चीजें निकाल ली गई थीं। इस सामान को गोवा के नेवी एविएशन म्यूजियम में भेज दिया गया था।
आईएनएस विक्रांत को इंडियन नेवी में पहले जहाज वाहक युद्धपोत के रूप में 1961 में शामिल किया गया था। 37 सालों तक यह इंडियन नेवी का हिस्सा रहा और जनवरी 1997 के बाद इसका इस्तेमाल नेवी ने बंद कर दिया।
भारत-पाकिस्तान युद्ध (1971) में इसका खूब इस्तेमाल हुआ था। आईएनएस विक्रांत ब्रिटिश में बनी एक ऐसी वॉरशिप है जिसे भारत ने 1957 में खरीदा था। इसे उस समय एमएसएस हरक्यूलिस के नाम से जाना जाता था।












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