सामुदायिक हिंसा से बचने के लिए राज्यों के बीच सूचना का आदान प्रदान जरूरी: जयललिता
नई दिल्ली। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने सोमवार को समाज में हिंसा का खतरा उत्पन्न करने वाली ताकतों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सामुदायिक पहचान या जातीयता के नाम पर होने वाले टकरावों पर अंकुश लगाए जाने की जरूरत है तथा इसके लिए विभिन्न राज्यों के बीच सूचना के आदान-प्रदान की आवश्यकता है।
जयललिता ने राष्ट्रीय एकता परिषद (एनआईसी) की 16वीं बैठक के दौरान ये बातें कहीं। जयललिता ने अपने भाषण में कहा, "आधुनिक भारतीय समाज में तनाव एवं असहिष्णुता को प्रत्यक्ष तौर पर देखा जा सकता है। इससे समाज के सामुदायिक पहचान एवं जातीयता के आधार पर झगड़ालू, संघर्षोन्मुख एवं खुली हिंसा करने वाले समाज के रूप में विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।"

तमिलनाडु के नगर प्रशासन एवं ग्रामीण विकास, कानून, न्याय एवं कारागार मंत्री के. पी. मुनुसामी ने जयललिता का भाषण पढ़ा। जयललिता ने केंद्र सरकार से इस बात पर गौर करने के लिए कहा कि संविधान के तहत कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य की होती है, तथा सभी राज्यों के साथ बराबरी का व्यवहार किया जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा, "राज्य एवं केंद्र के बीच समन्वय को तुच्छ राजनीति से ऊपर उठकर तरजीह दी जानी चाहिए।"












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