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    इंदिरा साहनी: 10 फ़ीसदी आरक्षण का उस तरह विरोध नहीं होगा

    By Bbc Hindi
    सामान्य वर्ग को 10 फ़ीसदी आरक्षण, आरक्षण
    Getty Images
    सामान्य वर्ग को 10 फ़ीसदी आरक्षण, आरक्षण

    सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए संविधान में संशोधन का विधेयक संसद के दोनों सदनों में पारित हो गया है.

    इससे आरक्षण की अधिकतम 50 फ़ीसदी सीमा के बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाने का रास्ता आसान हो गया है.

    1992 में सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता इंदिरा साहनी की याचिका पर ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाते हुए जाति-आधारित आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 फ़ीसदी तय कर दी थी.

    इंदिरा साहनी को अब लगता है कि आरक्षण विधेयक का इस बार उस तरह विरोध नहीं होगा जैसा कि 1992 में हुआ था.

    हालांकि वो इसे संविधान की मूल भावना के ख़िलाफ़ मानती हैं और चाहती हैं कि आरक्षण की सीमा 50 फ़ीसदी से अधिक न बढ़ें क्योंकि इससे मेरिट वालों को नुक़सान होगा.

    अपने याचिका दायर करने के फ़ैसले को याद करते हुए इंदिरा साहनी कहती हैं, "उस समय मैंने दिल्ली में झंडेवालान के पास एक रैली देखी थी. इसमें छात्र और अन्य युवा विरोध कर रहे थे. इसी से प्रभावित होकर मैंने मंडल आयोग का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी. इसी पर फ़ैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 फ़ीसदी तय कर दी थी."

    सामान्य वर्ग को 10 फ़ीसदी आरक्षण
    Reuters
    सामान्य वर्ग को 10 फ़ीसदी आरक्षण

    'बरक़रार हैं 1992 की वजहें'

    अब सरकार के आर्थिक आधार पर सामान्य वर्ग के लिए 10 प्रतिशत अधिक आरक्षण देने के फ़ैसले पर इंदिरा साहनी कहती हैं, "अब आर्धिक आधार पर दिया जा रहा ये दस प्रतिशत आरक्षण ग़लत है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा हैं और आर्थिक आधार पर जो आरक्षण दिया जा रहा है इसमें भारत की अधिकतर आबादी आ जाएगी इससे जो लोग इसके बाहर रह जाएंगे ये उनके बराबरी के अधिकार का हनन होगा."

    वो कहती हैं, "यही नहीं ये खुली प्रतियोगिता में मेरिट के आधार पर चयन के अधिकार का भी उल्लंघन होगा. ऐसे में मुझे लगता है कि ये संविधान की मूल भावना के ही ख़िलाफ़ होगा."

    इंदिरा साहनी कहती हैं कि जब उन्होंने 1992 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका जिन कारणों से की थी वो अब भी बरक़रार हैं.

    वो कहती हैं, "उस समय भी आरक्षण 50 फ़ीसदी की सीमा को पार कर रहा था और इसी का विरोध करने के लिए हमने याचिका दायर की थी. अब फिर से ऐसा हो रहा है. ये बराबरी के अधिकार के ख़िलाफ़ है."

    सामान्य वर्ग आरक्षण
    BBC
    सामान्य वर्ग आरक्षण

    'जो हो रहा, वो ग़लत है'

    इंदिरा कहती हैं, "जो हो रहा है वो होना नहीं चाहिए. ये ग़लत है और कोई ना कोई इसे भी चुनौती देगा."

    हालांकि उन्होंने अभी तक इसे अदालत में चुनौती देने का मन नहीं बनाया है. इस सवाल पर वो कहती हैं, "मैं इस बार इसे चुनौती देने नहीं जा रही हूं. मैंने इस बारे में सोचा नहीं है, अभी पूरी तरह से पता भी नहीं है कि सरकार करने क्या जा रही है. जब स्पष्ट जानकारी होगी और अगर ज़रूरी लगा तो मैं इसे चुनौती दे भी सकती हूं."

    इंदिरा कहती हैं, "जब मैंने याचिका दायर की थी तब आरक्षण की व्यवस्था का बेहद कड़ा विरोध हो रहा था. लोग मर रहे थे. लेकिन अब ऐसा नहीं लगता कि जनता कि ओर से इसका तीव्र विरोध होगा. क्योंकि आरक्षण के दायरे से बाहर रहने वाले लोगों की संख्या बहुत कम रह जाएगी."

    सुप्रीम कोर्ट
    Getty Images
    सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट में याचिका

    इसी बीच भारत में जातिगत आरक्षण के विरोध में अभियान चलाने वाले संगठन यूथ फ़ॉर इक्वलिटी ने सुप्रीम कोर्ट में आर्थिक आधार पर 10 फ़ीसदी अतिरिक्त आरक्षण को चुनौती दे दी है.

    याचिका दायर करने वाले केके मिश्रा ने बीबीसी से कहा, "हम आर्थिक आधार पर आरक्षण का विरोध नहीं कर रहे हैं, हम चाहते हैं कि ग़रीबों को आरक्षण मिले लेकिन ये 50 फ़ीसदी की सीमा के अतिरिक्त नहीं होना चाहिए बल्कि इसके भीतर ही होना चाहिए. यही मांग करते हुए हमने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है जिसे स्वीकार कर लिया गया है."

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    BBC Hindi
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    English summary
    Indira Sahni 10 percent reservation will not be opposed in that way

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