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'इंदिरा गांधी होना आसान नहीं!', भारत-पाक तनाव के बीच कांग्रेस ने लगाए पोस्टर, 1971 में क्या हुआ था?

Indira Gandhi Posters: भारत-पाकिस्तान के बीच एक बार फिर हालात गरम हैं। ऐसे समय में दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय के बाहर कुछ पोस्टर चर्चा में आ गए हैं। इन पोस्टरों में देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को याद किया गया है और लिखा गया है - 'इंदिरा गांधी होना आसान नहीं' और 'इंडिया मिसेज इंदिरा।'

इन पोस्टरों का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। कई लोग इसे मौजूदा हालात से जोड़कर देख रहे हैं, जब भारत ने पाकिस्तान पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि शनिवार, 10 मई की रात भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बड़ी घोषणा की थी।

Indira Gandhi

उन्होंने बताया कि भारत और पाकिस्तान के बीच यह समझौता हुआ है कि अब दोनों देश जमीन, हवा और समंदर में किसी भी तरह की फायरिंग या सैन्य कार्रवाई नहीं करेंगे। लेकिन भारत का आरोप है कि पाकिस्तान ने इस समझौते के कुछ ही घंटों बाद सीजफायर तोड़ दिया। इसी के बाद इंदिरा गांधी को याद करते हुए पोस्टर सामने आए, जिससे राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ गई है।
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भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ में राहत शिविर स्थापित किए हैं और विस्थापित नागरिकों को आवश्यक सहायता प्रदान कर रही है, क्योंकि पाकिस्तान और पीओके के आतंकवादी गढ़ों के अंदर भारतीय हमलों के जवाब में पाकिस्तान नागरिक क्षेत्रों को निशाना बना रहा है।

1971 में क्या हुआ था?

बांग्लादेश की आजादी में भारत की मदद

1971 में भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कई बड़े और साहसी फैसले लिए। उस साल पाकिस्तान के पूर्वी हिस्से (आज का बांग्लादेश) में लोगों पर सेना ने अत्याचार शुरू कर दिए थे। लाखों लोग अपनी जान बचाकर भारत आने लगे। इंदिरा गांधी ने उन्हें शरण दी और उनके लिए खाने-रहने का इंतजाम किया।

मुक्ति सेनाओं को समर्थन दिया गया

बांग्लादेश की आजादी के लिए लड़ने वाले लोगों को 'मुक्ति वाहिनी' कहा गया। भारत ने इंदिरा गांधी के नेतृत्व में इन सेनाओं को हथियार, ट्रेनिंग और बाकी मदद दी। यह सहायता छुपकर दी जा रही थी ताकि समय आने पर बड़ा कदम उठाया जा सके।

भारत-पाक युद्ध का ऐलान

दिसंबर 1971 में पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया। इंदिरा गांधी ने तुरंत फैसला लिया और युद्ध का आदेश दिया। भारतीय सेना ने कुछ ही दिनों में पाकिस्तान की सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना ने भारत के सामने समर्पण कर दिया।

बांग्लादेश बना नया देश

इस जीत के बाद बांग्लादेश को एक स्वतंत्र देश घोषित किया गया। भारत ने 6 दिसंबर 1971 को सबसे पहले बांग्लादेश को मान्यता दी। इसके बाद दुनिया के बाकी देशों ने भी उसे अलग देश के रूप में स्वीकार किया।

सोवियत संघ से दोस्ती मजबूत की

उस समय अमेरिका और चीन पाकिस्तान के साथ थे। ऐसे में इंदिरा गांधी ने सोवियत संघ (आज का रूस) से एक शांति और दोस्ती की संधि की। इससे भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिली।

90,000 पाक सैनिक बने युद्धबंदी

भारत ने युद्ध के दौरान करीब 90,000 पाकिस्तानी सैनिकों को बंदी बनाया। इंदिरा गांधी ने युद्ध के बाद शांति कायम रखने के लिए संतुलन बनाकर काम किया और इन सैनिकों को बाद में सुरक्षित लौटाया गया।

नेतृत्व की मिसाल बनीं इंदिरा गांधी

1971 में लिए गए इन फैसलों ने इंदिरा गांधी को एक मजबूत और दूरदर्शी नेता साबित किया। उन्होंने भारत की सेना, विदेश नीति और मानवता तीनों को संतुलन में रखकर देश का नाम ऊँचा किया।
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