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IndiGo Flight Crisis: इंडिगो संकट पर दिल्ली हाई कोर्ट की फटकार, केंद्र से पूछा- इस हाल के लिए कौन जिम्मेदार?

IndiGo Flight Crisis: देश में इंडिगो एयरलाइंस का फ्लाइट संकट लगातार गहराता जा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि मामला सुप्रीम कोर्ट से लेकर दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुँच गया है। एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट ने इस अव्यवस्था को "गंभीर मामला" बताया।

वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने इंडिगो से जुड़ी याचिका पर 10 दिसंबर को सुनवाई की और केंद्र को कटघरे में खड़ा किया। विस्तार से जानिए कोर्ट में हियरिंग के दौरान क्या-क्या हुआ...

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दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे। अदालत ने कहा कि सरकार ने कार्रवाई तभी की जब संकट गहराया, जबकि असली सवाल यह है कि ऐसा संकट पैदा ही क्यों होने दिया गया।

दिल्ली हाईकोर्ट में क्या हुआ?

दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसमें केंद्र सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि रद्द उड़ानों के सभी यात्रियों को तत्काल सहायता दी जाए और सभी टिकटों का पैसा तुरंत रिफंड किया जाए। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने मामले की सुनवाई 10 दिसंबर को तय की।

वहीं सरकार का दावा है कि सभी कैंसिलेशन का पैसा रिफंड कर दिया गया है। नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने बताया सभी PNR रद्दीकरण के 100% रिफंड कर दिए गए हैं। यात्रियों के बैग अगले 24 घंटे में पहुंच जाएंगे। उन्होंने कहा कि 90% बैगेज पहले ही ट्रेस कर लिया गया है और एयरलाइन यात्रियों के घर तक सामान पहुंचा रही है।

हाई कोर्ट का सख्त सवाल- कौन जिम्मेदार?

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान केंद्र से कड़े शब्दों में पूछा- सवाल यह है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न क्यों हुई? जिम्मेदार कौन है? यह सिर्फ एयरपोर्ट्स पर फंसे यात्रियों का मुद्दा नहीं है, यह अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान का सवाल है। LiveLaw के मुताबिक अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इतने बड़े पैमाने पर हुए व्यवधान राष्ट्रीय स्तर की चिंता का विषय बन चुके हैं।

लोगों की मदद के लिए क्या कदम उठाए?-अदालत का सवाल

कोर्ट ने यह स्वीकार किया कि सरकार ने संकट को संभालने के लिए कुछ प्रयास किए, लेकिन यह भी पूछा कि यात्रियों की सहायता और मुआवज़े के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए। हाई कोर्ट ने कहा-"यह सिर्फ एयरपोर्ट पर फंसे हुए यात्रियों का सवाल नहीं है। सवाल अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान का भी है। आपने लोगों की मदद और मुआवज़ा देने के लिए क्या कदम उठाए?"

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को इंडिगो एयरलाइंस में जारी बड़े पैमाने पर फ्लाइट व्यवधानों का स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा कि आखिर इस स्तर का संकट पैदा कैसे हुआ। पिछले नौ दिनों में इंडिगो को 4600 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ी हैं, जिससे देशभर में यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई, पर हस्तक्षेप नहीं किया

बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इंडिगो संकट पर चिंता जताते हुए कहा कि "लाखों लोग एयरपोर्ट पर फंसे हैं, मामला गंभीर है।" हालांकि अदालत ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट का कहना था कि केंद्र सरकार पहले से इस मुद्दे पर सक्रिय रूप से काम कर रही है और स्थिति को सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, इसलिए इस समय न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

कितनी उड़ानें रद्द हुईं?

इंडिगो ने मंगलवार को एक ही दिन में 400 से अधिक उड़ानें रद्द कीं। दिल्ली - 152 उड़ानें रद्द, बेंगलुरु - 121, हैदराबाद - 58, चेन्नई - 41,अहमदाबाद - 16,तिरुवनंतपुरम - 4, मुंबई - 3 फ्लाइट्स कैंसिल हो चुकी हैं। पिछले नौ दिनों में करीब 5,000 उड़ानें रद्द हो चुकी हैं।

इंडिगो का यह संकट भारत की उड्डयन इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा झटका बन गया है। जहां हजारों यात्री फंसे हैं, वहीं एयरलाइन, DGCA और सरकार सभी समाधान की कोशिश में जुटे हैं। हाईकोर्ट की सुनवाई और सरकारी निर्देशों से उम्मीद है कि आने वाले दिनों में स्थिति सुधर सकती है-लेकिन फिलहाल यात्रियों की परेशानी अभी भी जारी है।

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