डिस्कवरी दिखायेगा Project Cheetah पर वेब सीरीज, केंद्र सरकार ने दी मंजूरी
Project Cheetah: केंद्र सरकार यानी राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने प्रोजेक्ट चीता पर चार भागों वाली वेब सीरीज को हरी झंडी दे दी है, जो अफ्रीका से चीतों को स्थानांतरित करने के भारत के प्रयासों पर केंद्रित है। इस प्रोजेक्ट की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर सितंबर में फिल्मांकन शुरू होने वाला है। यह सीरीज डिस्कवरी नेटवर्क पर 170 देशों में विभिन्न भाषाओं में प्रसारित की जाएगी।
वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने डॉक्यूमेंट्री के समय को लेकर चिंता जताई है, उनका सुझाव है कि पहले मौजूदा चुनौतियों का समाधान किया जाना चाहिए। अब तक बीस चीते भारत लाए जा चुके हैं, लेकिन उनमें से कुछ की मौत हो गई है, और हाल ही में एकमात्र स्वतंत्र रूप से घूमने वाला चीता मृत पाया गया।

श्रृंखला के निर्माताओं ने 'मध्य प्रदेश पर्यटन' और एमपी टाइगर फाउंडेशन से 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मांगी है। शिकार वृद्धि और तेंदुआ प्रबंधन परियोजना के लिए महत्वपूर्ण बाधाएं हैं। अधिकारी कुनो और गांधी सागर में शिकार ला रहे हैं और तेंदुओं को स्थानांतरित करने का अभियान शुरू किया है।
प्रोजेक्ट चीता की संचालन समिति ने मानसून के मौसम के बाद धीरे-धीरे चीतों और उनके बच्चों को जंगल में छोड़ने की योजना बनाई है। भारत दक्षिण अफ्रीका और केन्या के साथ और अधिक चीते लाने के लिए बातचीत कर रहा है। अगला बैच गांधी सागर में लाया जाएगा, क्योंकि कुनो अपनी वहन क्षमता तक पहुँच चुका है।
अधिकारी तेंदुओं की बढ़ती आबादी को लेकर चिंतित हैं, जिससे चीतों के लिए शिकार की उपलब्धता कम हो सकती है। इस समस्या को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के प्रयास चल रहे हैं। वेब सीरीज़ का उद्देश्य परियोजना की अवधारणा, चीतों को भारत वापस लाने में आने वाली कठिनाइयों, उनकी वर्तमान स्थिति और भविष्य की अपेक्षाओं को उजागर करना है।
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