कोयले का काल- 2 दिन बाद अंधेरे में डूब जाएंगे कई राज्य

देश के करीब 50 फीसदी ताप बिजलीघर कोयले के संकट की समस्या से जूझ रहे हैं और इनके पास सात दिन से कम का भी कोयला भंडार है। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र की एनटीपीसी के बिजलीघर भी शामिल हैं। इन बिजलीघरों की कुल उत्पादन क्षमता 20,000 मेगावाट से अधिक है।
राज्य जो सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे
उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात के कुछ भाग, हरियाणा के कुछ भाग में, पंजाब के अधिकांश भाग हैं जो सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
एनटीपीसी की तरफ से सरकार को एसओएस भेज कर कोयले की कमी का जानकारी दे दी गई है। कोयला स्टॉक की जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने भी माना कि देश में कोयले की कमी है और इस संकट से निपटने के लिए कार्य किया जा रहा है। इतना ही नहीं गोयल से संकेत दिए कि दिल्ली में बिजली के दाम बढ़ सकते हैं।
एनटीपीसी ने सरकार को जानकारी देते हुए कहा है कि उनके पास केवल दो दिन से भी कम के लिए कोयला बचा है। 17000 मेगावॉट की क्षमता वाले एनटीपीसी के छह प्लांट कोयले के स्टॉक की कमी के कारण बंद कर दिए गए हैं। इन छह में से पांच थर्मल प्लांट उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्र में स्थित हैं। पश्चिम में कोयले पर निर्भर 13 पावर प्लांट और पूर्व में 4 प्लांट की भी स्थिति बेहद चिंताजनक है।












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