पाकिस्तान के शादानी दरबार उत्सव में शामिल होंगे भारतीय, 87 हिंदू तीर्थयात्रियों को मिला वीजा
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित शिव अवतारी संत शदाराम साहिब की 316वीं जयंती समारोह में शामिल होने के लिए इंतजार करने भारतीयों की प्रतीक्षा खत्म हुई। पाकिस्तान ने 87 हिंदू भारतीयों को वीजा दिया है।पाकिस्तान के उच्चायोग की ओर शुक्रवार को साझा की जानकारी में कहा गया कि पाकिस्तान ने सिंध स्थित एक मंदिर में संत सदाराम साहिब की जयंती समारोह के अवसर पर देश की यात्रा करने के इच्छुक भारत के हिंदू तीर्थयात्रियों के वीजा जारी करने की पुष्टि की।
पाक उच्चायोग ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा, "नयी दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग ने सिंध के शदाणी दरबार हयात पिताफी में शिव अवतारी गुरु संत सदाराम साहिब की 316वीं जयंती समारोह में शिरकत करने के लिए 24 नवंबर से चार दिसंबर तक पाकिस्तान की यात्रा के इच्छुक भारत के हिंदू तीर्थयात्रियों के लिए 87 वीजा जारी किए हैं।"

भारत- पाक समझौते के तहत वीजा
बता दें कि शादाणी दरबार जाने के लिए वीजा पाने के लिए, भारत-पाकिस्तान के बीच धार्मिक तीर्थयात्राओं पर संयुक्त प्रोटोकॉल, 1974 के तहत आवेदन किया जाता है। इस प्रोटोकॉल के तहत, दोनों देशों के तीर्थयात्रियों को कुछ धार्मिक स्थलों पर जाने के लिए सामान्य आव्रजन प्रक्रिया से गुजरे बिना वीजा मिलता है।
शादाणी दरबार का तीन सदियों पुराना इतिहास
शादाणी दरबार मंदिर का इतिहास 300 साल पुराना है। यह स्थल धर्म, संस्कृति के साथ लोगों को मानव सेवा के लिए प्रेरित करता रहा है। दरबार में 315 साल पुरानी गद्दी है, जिस पर पीठाधीश्वर ही बैठते हैं। यह शहर का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां सनातन धर्म के लगभग सभी ऋषि-मुनियों और देवी-देवातओं के चित्र हैं। यही नहीं, देवी-देवताओं के वाहनों के चित्र भी यहां देख सकते हैं। इसी कैंपस में स्कूल और हॉस्पिटल भी संचालित है।
यहां हर साल मेडिकल कैंप लगाया जाता है, जिसमें देश के अलावा विदेशों के भी डॉक्टर आते हैं। मरीजों का निशुल्क इलाज करते हैं। यह धार्मिक स्थल अविभाजित भारत में पहले सिंध प्रांत में था। उस समय दरबार के आठवें पीठाधीश्वर सद्गुरु संत गोविंद राम साहिब 1969 में रायपुर आए और पंडरी के पास 4 हजार स्क्वेयर फीट में दरबार बनवाया। यहां भक्तों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए संत गोविंद राम साहिब ने 1988 में माना में 12 एकड़ में शदाणी दरबार बनवाया। इसका आकार गोमुखी है।
यहां जलाशय और मेडिटेशन सेंटर भी
दरबार के अलावा यहां जलाशय भी है। धार्मिक स्थल के परिसर में वर्ष 1992 में स्कूल की स्थापना की गई, जहां बेहद कम शुल्क पर बच्चों को शिक्षा दी जाती है। वर्ष 2003 से अब तक संत डॉ. युधिष्ठिर लाल महाराज 9वें पीठाधीश्वर के रूप में दरबार की ऐतिहासिक गद्दी संभाल रहे हैं। 2003 में ही यहां मेडिटेशन सेंटर बनाया गया था। दरबार में जो भी सेवाएं दी जाती हैं, उसका संचालन हजारों अनुयायी मिलकर करते हैं। शदाणी दरबार की शाखाएं दूसरे राज्यों में भी संचालित हैं।
बच्चों की दी जाती है सनातन की शिक्षा
स्कूली बच्चों के लिए गर्मियों की छुटि्टयों में यहां विशेष कैंप लगाया जाता है। दरबार में लगने वाले इस कैंप को 'सनातन संस्कार' नाम दिया गया है। इस शिविर बच्चों को सनातन धर्म और संस्कृति के साथ मानव सेवा के लिए प्रेरित किया जाता है। कैंप में राष्ट्रीय स्तर के सनातनी ट्रेनर आते हैं, जो बच्चों को मोटिवेट करते हैं।
कौन थे संत शदाराम साहिब?
संत शदाराम साहिब का जन्म सूर्यवंशी लोहना खत्री परिवार में 1708 में लाहौर पंजाब में हुआ। बाल अवस्था से ही दैवीय गुण, मुख मंडल पर अपूर्व तेज था। तप और भक्ति से परिपूर्ण उनकी ओजस्वी वाणी में ऐसी क्षमता थी कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते थे। भारत के विभिन्न शहरों में 40 वर्ष तक उन्होंने राम-नाम का प्रचार किया। 1786 में सिंध के हयात पिताफी में धूणी प्रज्ज्वलित कर अपना डेरा जमाया और गद्दीपीठ की स्थापना की थी।












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