CAA के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मुस्लिम लीग, एक्ट के नोटिफिकेशन पर रोक लगाने की मांग की

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून का देश के कई राज्यों में विरोध हो रहा है। दिल्ली सहित कई गैर-बीजेपी शासित राज्यों ने इसे अपने राज्य में लागू ना करने का ऐलान किया है, तो वहीं केरल सरकार ने इस एक्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अब इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भी नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

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इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने अपनी याचिका में सीएए के नोटिफिकेशन पर रोक की मांग की है। केंद्र सरकार ने 11 जनवरी को संशोधित नागरिकता कानून की अधिसूचना जारी कर दी थी। इसके साथ ही यह कानून पूरे देश में प्रभावी हो गया। पिछले महीने संसद के दोनों सदनों ने इस कानून को मंजूरी दी थी। इसी कानून को लेकर देशभर में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। 12 दिसंबर को राष्ट्रपति कोविंद ने संशोधित नागरिकता कानून को मंजूरी दी थी।

गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में लिखा है, 'केंद्रीय सरकार, नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (2019 का 47) की धारा 1 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए, 10 जनवरी 2020 को उस तारीख के रूप में नियत करती है जिसको उक्त अधिनियम के उपबंध प्रवृत होंगे। बता दें कि, नागरिकता संशोधन विधेयक 10 दिसंबर को लोकसभा और उसके एक दिन बाद राज्यसभा में पारित हुआ था।

वहीं, इस एक्ट के खिलाफ 14 जनवरी को केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। केरल सरकार ने इसके लिए आर्टिकल 131 के तहत सुप्रीम कोर्ट में शूट दाखिल किया है। केरल पहला राज्य है जिसने नागरिकता संशोधन कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस याचिका में कहा गया है कि नागरिकता संशोधन कानून को संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 का उल्लंघन करने वाला कानून घोषित किया जाना चाहिए।

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