Indian Railways का नया रिकॉर्ड: 1372 लोकोमोटिव प्रोडक्शन, इलेक्ट्रिक इंजनों का दबदबा, पिछले साल से कितनी बढ़त?
Indian Railways New Record: भारतीय रेलवे ने एक बार फिर अपनी क्षमता का दम दिखाते हुए नया रिकॉर्ड बना दिया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (CLW) और बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (BLW) ने मिलकर कुल 1372 लोकोमोटिव का उत्पादन किया। यह अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक आंकड़ा है।
खास बात यह कि इनमें से 1358 लोकोमोटिव इलेक्ट्रिक हैं, जबकि सिर्फ 14 डीजल लोकोमोटिव हैं। इसका मतलब साफ है - रेलवे तेजी से विद्युतीकरण की राह पर है और आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) के लक्ष्य को हासिल करने में एक बड़ा कदम आगे बढ़ा दिया है। आइए जानते हैं कहां हुई बढ़त?

Indian Railways Locomotive Production: उत्पादन का पूरा ब्रेकडाउन
| उत्पादन इकाई | कुल लोकोमोटिव | इलेक्ट्रिक लोको | खास हाइलाइट्स |
|---|---|---|---|
| CLW (चित्तरंजन + दनकुनी) | 800 | 800 | चित्तरंजन: 600 दनकुनी: 200 |
| BLW (वाराणसी) | 572 | 558 | WAG-9: 401 WAP-7: 143 अमृत भारत: 14 डीजल: 14 |
| कुल | 1372 | 1358 | निर्यात (मोजाम्बिक): 10 गैर-रेलवे: 4 |
पिछले साल से कितनी बढ़ोतरी?
- CLW: 700 से 800 करीब 14.3% बढ़ोतरी (100 लोकोमोटिव ज्यादा)
- BLW: 477 से 572 करीब 19.9% बढ़ोतरी (95 लोकोमोटिव ज्यादा)
यह बढ़ोतरी सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि रेलवे की क्षमता और दक्षता को दर्शाती है।
क्यों मायने रखता है यह रिकॉर्ड?
- तेज विद्युतीकरण: 1358 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव से रेलवे अपने नेटवर्क को और ज्यादा ग्रीन और सस्ता बनाने की दिशा में आगे बढ़ गया। इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव डीजल की तुलना में कम खर्चीले और पर्यावरण अनुकूल होते हैं।
- अधिक ट्रेनें, बेहतर सेवा: नए लोकोमोटिव से वंदे भारत, अमृत भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी। यात्री और माल ढुलाई दोनों तेज होगी।
- आत्मनिर्भरता और निर्यात: बनारस लोकोमोटिव वर्क्स ने 10 लोकोमोटिव मोजाम्बिक को निर्यात किए। यह भारत को वैश्विक रेलवे बाजार में मजबूत बनाता है।
- रोजगार और अर्थव्यवस्था: इन दो यूनिट्स में हजारों इंजीनियर, टेक्नीशियन और मजदूर सीधे जुड़े हैं। बढ़ा उत्पादन, मतलब ज्यादा रोजगार।
आगे का लक्ष्य (FY 2026-27)
- BLW का लक्ष्य: 642 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव
- CLW भी उत्पादन बढ़ाने की तैयारी में
रेल मंत्रालय का फोकस अब और तेज गति से इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बनाने पर है ताकि 2030 तक रेलवे को पूरी तरह ग्रीन बनाने का सपना हासिल हो सके।
FY 2025-26 में 1372 लोकोमोटिव का उत्पादन भारतीय रेलवे की क्षमता का नया प्रमाण है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि 'न्यू इंडिया' की विकास गाथा का हिस्सा है - जहां गति, पर्यावरण और आत्मनिर्भरता साथ-साथ चल रहे हैं।












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