Newspapers Society Towers: आजादी में न्यूजपेपर्स सोसाइटी की क्या थी भूमिका, जिसे मिली 29400 करोड़ की सौगात
भारत की आजादी में पत्रकारिता के योगदान का कभी भुलाया नहीं जा सकता है। इस हफ्ते जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई में इंडियन न्यूजपेपर्स सोसाइटी टावर्स को उद्घाटन किया तो कई सारी यादें एक साथ ताजा हो गई हैं। इसका अनुभव इसलिए भी हुआ, क्योंकि मंच से पीएम मोदी ने भारतीय पत्रकारिता के उन दिनों को याद किया जब अपने देश में ही आक्रांताओं को गोरों के जरिए इसका गला घोंटने का काम किया जा रहा था।
भारत की आजादी में पत्रकारिता के योगदान का कभी भुलाया नहीं जा सकता है। इस हफ्ते जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई में इंडियन न्यूजपेपर्स सोसाइटी टावर्स को उद्घाटन किया तो कई सारी यादें एक साथ ताजा हो गई हैं। इसका अनुभव इसलिए भी हुआ, क्योंकि मंच से पीएम मोदी ने भारतीय पत्रकारिता के उन दिनों को याद किया जब अपने देश में ही आक्रांताओं को गोरों के जरिए इसका गला घोंटने का काम किया जा रहा था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी (आईएनएस) के सचिवालय आईएनएस टावर का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने 29000 करोड़ रुपए खर्च कर ठाणे बोरीवली सुरंग परियोजना और गोरेगांव मुलुंड लिंक रोड प्रोजेक्ट समेत अन्य महत्त्वपूर्ण परियोजना का भूमिपूजन किया।
इस मौके पर पीएम सरकार और मीडिया के गठजोड़ पर बात की। उन्होंने कहा कि विकसित बनने के मीडिया की बड़ी भूमिका है। पीएम मोदी ने कहा, "मीडिया लोगों को उनकी ताकत से अवगत कराता है। मीडिया की स्वाभाविक भूमिका विमर्श को शुरू करना है। 2014 से पहले ज्यादातर लोग स्टार्टअप शब्द से अनजान थे, लेकिन मीडिया ने इसे घर-घर तक पहुंचा दिया।"
दरअसल, इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी का गठन आजादी से पहले किया गया था, प्रधानमंत्री ने कहा कि संगठन न केवल भारत की यात्रा के उतार-चढ़ाव देखा।
1939 में इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी का गठन
इंडियन एंड ईस्टर्न न्यूजपेपर सोसाइटी जो कि प्रेस ऑफ़ इंडिया के केंद्रीय संगठन के रूप में कार्य करती है , जो भारत में समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के प्रसार के आंकड़ों को प्रमाणित करने वाली एक स्वतंत्र संस्था है। यह भारत में प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा और उसे बढ़ावा देने में एक प्रमुख भूमिका निभाती है। सोसाइटी की भारत में शुरुआत 1939 में हुई थी।
इससे पहले 1 अक्टूबर, 1927 को लंदन में भारत, बर्मा और सीलोन समाचार पत्र समिति अस्तित्व में आई। इसके बाद 4 अक्टूबर, 1935: लंदन स्थित इस सोसायटी का नाम बदलकर इंडियन एंड ईस्टर्न न्यूजपेपर सोसायटी (IENS) कर दिया गया। इससे पहले ये समिति यह भारत, बर्मा, सीलोन और अन्य एशियाई देशों में प्रकाशित समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, समीक्षाओं और अन्य पत्रिकाओं का प्रतिनिधित्व करती थी।
आजादी में क्या भूमिका?
1939 में अपनी पहली वार्षिक आम बैठक में, इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी ने सैद्धांतिक रूप से एक ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन (एबीसी) के निर्माण को मंजूरी दी। हालांकि, स्वतंत्रता के बाद, एबीसी को औपचारिक रूप से भारत में समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के प्रसार आंकड़ों को प्रमाणित करने वाली एक स्वतंत्र संस्था के रूप में स्थापित किया गया था। सोसाइटी के अस्तित्व में आने के बाद समाचार पत्रों की संख्या बढ़ने लगी। अंग्रेजों को जुल्म के खिलाफ कई पत्रकारों ने खुलकर अपनी कलम चलाई। जिसके चलते समाज में एक धारणा बनी की भारत भारतवासियों का है और यहां से विदेशी ताकतों को उखाड़ फेकना है और यहां से एक अगल संघर्ष शुरु हुआ।












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