युद्ध के हालात में दुश्मन को मिलेगा कड़ा जवाब, लद्दाख में शुत्रजीत ब्रिगेड ने 14 हजार फीट पर दिखाया पराक्रम
लेह, 01 नवबंर: पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति जारी है। चीन अपने चालबाजी से बाज नहीं आ रहा है। ऐसे में भारत भी किसी भी परिस्थिति में चीन का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है। एक तरफ चीन उकसाने वाली हरकतों को नहीं रोक रहा तो दूसरी तरफ अब भारत ने भी चीन को अपनी ताकत का एहसास करना शुरू कर दिया, जिसका ताजा उदाहरण 14 हजार फीट की ऊंचाई पर किया अभ्यास है।
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भारतीय सेना का हवाई अभ्यास शुरू
भारतीय सेना ने सोमवार को चीन से तनातनी वाले पूर्वी लद्दाख एरिया में अपनी तीव्र प्रतिक्रिया क्षमताओं को साबित करने के लिए हवाई अभ्यास शुरू किया है, जिसमें सैनिकों और उपकरणों के मूवमेंट, सटीक स्टैंड-ऑफ ड्रॉप्स, रेपिड ग्रुपिंग और कम समय में गति और आश्चर्य के साथ टारगेट को पकड़ने की क्षमता शामिल है।

चीन से तनाव के बीच सेना का अभ्यास
सेना यह ड्रिल ऐसे वक्त हो रहा है, जब वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन के बीच गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। दरअसल यह जानकारी इस मामले से जुड़े अधिकारियों ने अपना नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताई है। इस अभ्यास में हवाई ब्रिगेड शत्रुजीत शामिल रहा।

5 अलग-अलग ठिकानों पर ले जाया गया
शत्रुजीत हवाई ब्रिगेड, जिसमें सेना के बेहतरीन पैराट्रूपर्स शामिल हैं। तीन दिवसीय उच्च ऊंचाई वाले युद्धाभ्यास का केंद्र बिंदु है, जिसमें सैनिकों को शुरुआती दिन 14,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर एक ड्रॉप जोन में डाला गया था। इस ड्रील की जानकारी साझा करते हुए अधिकारी ने बताया कि स्पशेल वाहनों और मिसाइल टुकड़ियों के साथ अमेरिकी मूल के C-130J स्पेशल ऑपरेशनल एयरक्राफ्ट और सोवियत मूल के AN-32 मीडियम ट्रांसपोर्ट प्लेन के जरिए थिएटर को 5 अलग-अलग ठिकानों से ले जाया गया।

चीन को भारतीय सेना का साफ संदेश
एक दूसरे ऑफिसर के मुताबिक इस दौरान ड्रॉफ्स विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि यह माइनस 20 डिग्री की स्थिति में हुई थी। विशेषज्ञों ने बताया कि यह अभ्यास का समय महत्वपूर्ण था, क्योंकि लद्दाख में तनाव को शांत करने के लिए भारत और चीन के बीच 13 वें दौर की सैन्य वार्ता के तीन हफ्ते बाद इसका आयोजन किया जा रहा था। उत्तरी सेना के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीएस जसवाल (सेवानिवृत्त) ने कहा कि भारतीय सेना उच्च ऊंचाई वाले अभ्यास के साथ चीन को अपनी लड़ाकू क्षमताओं का स्पष्ट रूप से प्रदर्शन कर रही है। साथ ही अब सेना यह संदेश दे रही है कि पीएलए को भारतीय सैन्य क्षमताओं को कम नहीं आंकना चाहिए।












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