आतंकी के बेटे की जान बचाने में भी देर न करने वाली इंडियन आर्मी

श्रीनगर। पिछले हफ्ते कश्‍मीर के पुलवामा में पंपोर में हुए एनकाउंटर में इंडियन आर्मी ने भले ही अपने तीन बहादुरो को खो दिया लेकिन उसने हर नागरिक की जिंदगी सुरक्षित की।

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इन्‍हीं नागरिकों में से एक था हिजबुल मुजाहिद्दीन के चीफ सैयद सलाहुद्दीन का बेटा जिसकी जान इंडियन आर्मी ने बचाई लेकिन इसके बावजूद आतंकी अपने साथियों की तारीफ कर रहा है।

लश्‍कर-ए- तैयबा के आतंकियों ने पिछले दिनों पंपोर की एक सरकारी बिल्डिंग पर हमला कर दिया था। इसमें करीब 100 लोग फंसे हुए थे जिसमें सलाहुद्दीन का बेटा 31 वर्षीय सैयद मोइन भी फंसा हुआ था।

इंडियन आर्मी ने जरा भी फर्क नहीं किया और उसे भी सुरक्षित बाहर निकाला। मोइन ने बताया कि उसे पहचानने के बाद भी उसे आर्मी ने बिल्‍कुल भी परेशान नहीं किया।

मुश्किल के समय जैसा बर्ताव आर्मी बाकी लोगों के साथ कर रही थी वैसा ही उसके साथ भी किया गया। बाकी कर्मचारियों और लोगों के साथ सेना ने उसे भी सुरक्षित बाहर निकाला।

सलाहुद्दीन जो कि इस समय पीआके में है, उसे अपने बेटे की बात को भी दरकिनार कर दिया और इस हमले में शामिल आतंकियों की जमकर तारीफ की।

हो सकता है कि मोइन की इस बात से कश्‍मीर घाटी के उन कुछ लोगों की सोच बदल सके जो अक्‍सर सेना और सुरक्षाबलों को अपना दुश्‍मन मान एनकाउंटर के समय उनके खिलाफ नारे लगाते हैं।

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