LAC:भारतीय सेना की खास तैयारी, ऊंचे और दुर्गम इलाकों के लिए ऐसे 300 विशेष वाहन खरीदने की योजना
भारतीय सेना ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में हर मौसम में काम आने लायक 300 वाहन खरीदने की योजना तैयार की है। इसे फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया से खरीदा जाना है, ताकि जल्द तैनाती की जा सके।

भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी गतिरोध के बीच भारतीय सेना अपनी तैयारियों को लगातार मजबूत करने में लगी हुई है। एक तरफ सीमा के आसपास इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने का काम तो चल ही रहा है, सैन्य साजो-सामान को उन्नत करने में भी सेना पीछे नहीं है। अब भारतीय सेना ने ऊंचाई वाले दुर्गम स्थानों में मुश्किल से मुश्किल मौसम में भी डटे रहने वाले 300 खास वाहन खरीदने की तैयारी शुरू कर दी है। इन वाहनों को खरीदने के लिए भारतीय सेना फास्ट-ट्रैक खरीद प्रक्रिया अपनाने वाली है।

दुर्गम इलाकों के लिए 300 वाहन खरीदेगी सेना-रिपोर्ट
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय सेना दुर्गम क्षेत्रों और मध्यम से ऊंचाई वाली जगहों के लिए 300 स्वदेश में विकसित वाहन खरीदने की योजना पर काम कर रही है। एचटी ने इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के हवाले से कहा है कि इन वाहनों का इस्तेमाल लोड ढोने के अलावा आपात स्थिति में की जा सकती है। मंगलवार को अधिकारियों ने जानकारी दी कि इसके लिए भारतीय सेना आपातकालीन खरीदारी वाली फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया अपनाएगी। इतके तहत हाइली-मोबाइल, मल्टी-कंफिगरेबल, व्हील्ड व्हीकल खरीदे जाएंगे।

'हेलीकॉप्टर से ढोने लायक हों वाहन'
सेना में इस तरह के वाहन खरीदने की सुगबुगाहट तब देखी जा रही है, जब पूर्वी लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के उस पार से चीन किसी ना किसी नापाक हरकत को अंजाम देने में लगा हुआ है। इसके चलते दोनों देशों में तनाव का माहौल लगातार बना हुआ है। सेना ने इसकी संभावित बोली लगाने वाले भागीदारों के लिए जो रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) सामने रखा है, उसमें कहा गया है कि यह ऐसे वाहन होने चाहिए, जिसे हेलीकॉप्टर से ढोया जा सके और यह 16,000 फीट की ऊंचाई पर भी इस्तेमाल के योग्य हों। RFP में कहा गया है, 'लंबे समय तक बर्फ से ढके लहरदार क्षेत्रों में काम ऑपरेट करने की उनकी क्षमता उन्हें लास्ट-माइल डिलिवरी के कार्यों के लिए आदर्श रूप से उपयुक्त बनाती हैं।'

'मुश्किल से मुश्किल मौसम में इस्तेमाल योग्य'
सेना इन वाहनों का इस्तेमाल माइनस 20 डिग्री से लेकर 45 डिग्री तक के तापमान में करना चाहती है। सेना की जरूरतों में इंबिल्ट कोल्ड इंजन स्टार्ट सिस्टम भी शामिल है। इसके अलावा इन सैन्य वाहनों की इंजन शक्ति 30 HP और ऑपरेटिंग रेंज भी 100 किलोमीटर से कम नहीं होनी चाहिए। अधिकारियों ने कहा है कि इन वाहनों को लद्दाख और पूर्वी सेक्टर में भी तैनात किया जा सकता है।

12 महीनों के भीतर करनी होगी डिलिवरी
RFP में कहा गया है कि दुर्गम इलाके में इस्तेमाल किए जाने लायक वाहनों में एक रोलओवर प्रोटेक्शन सिस्टम और उसकी सर्विस लाइफ कम से कम 9 साल या 80,000 किलोमीटर होनी चाहिए। करार पर हस्ताक्षर होने के बाद यह वाहन 12 महीनों के भीतर डिलिवर करने होंगे और इसमें ऑपरेटरों के ट्रेनिंग पैकेज समेत बाकी सभी तरह की सपोर्ट संबंधी डिटेल भी दी गई है।

चीन की चालबाजियों पर नजर रख रही है सेना
चीन की चालबाजियों को देखते हुए भारतीय सेना इसकी सीमा से लगे इलाकों में अपनी ऑपरेशनल क्षमता को लगातार अपग्रेड करने में लगी हुई है। इसके तहत कई तरह के आर्टिलरी गन से लेकर वेपन सिस्टम, स्वार्म ड्रोन सिस्टम, लॉन्ग-रेंज रॉकेट, रिमोटली पायलेटेड एरियल सिस्टम और हाई-मोबिलिटी प्रोटेक्टेड व्हीकल भी शामिल किए जा रहे हैं। इनके अलावा माउंटेन वॉरफेयर और फ्यूचरिस्टिक इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स के लिए हल्के टैंकों के विकास पर भी काम चल रहा है। (तस्वीरें- प्रतीकात्मक)












Click it and Unblock the Notifications