गलवान नदी में गिरे अपने साथियों को बचाने में महाराष्‍ट्र के नायक सचिन मोरे का निधन

नई दिल्‍ली। पूर्वी लद्दाख में स्थित लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर एक और भारतीय जवान के शहीद होने की खबरें आ रही हैं। महाराष्‍ट्र के रहने वाले नायक सचिन मोरे का निधन हो गया है। नायक सचिन ने गलवान नदी में गिरे अपने दो साथियों को बचाने के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी है। गौरतलब है कि 15/16 जून को एलएसी पर भारत और चीन के बीच टकराव हिंसक हो गया था। दोनों सेनाओं के बीच हुई हिंसा में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे।

पुल पर चल रहा था काम

पुल पर चल रहा था काम

नायक सचिन मोरे उस समय शहीद हुए जब वह गलवान नदी में गिरे अपने दो साथियों को बचाने की कोशिश कर रहे थे। वह नाशिक के मालेगांव के रहने वाले थे। एनसीपी के नेता और महाराष्‍ट्र के उप-मुख्‍यमंत्री अजित पवार ने गुरुवार को मोरे को श्रद्धांजलि दी है। पवार ने ट्वीट किया और लिखा, 'महाराष्‍ट्र के अच्‍छे बेटे सचिन विक्रम मोरे देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए। वह गलवान नदी में गिरे अपने दो साथियों को बचाने के प्रयास में शहीद हो गए।' पवार की ट्वीट से जानकारी मिलती है कि मोरे के दो साथी उस समय नदी में गिर गए थे जब गलवान नदी पर पुल निर्माण का कार्य जारी था। महाराष्‍ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने मोरे की शहादत पर उनके परिवार को संवेदनाएं दी हैं।

पूरा हुआ गलवान नदी पर बन रहा पुल

पूरा हुआ गलवान नदी पर बन रहा पुल

इंडियन आर्मी इंजीनियरों ने उस 60 मीटर लंबे पुल को पूरा कर लिया है जो पूर्वी लद्दाख में गलवान नदी पर बन रहा था। इस पुल को लेकर ही चीन खासा परेशान था और उसने इसक निर्माण कार्य रोकने की भी कोशिशें की थीं।टॉप ऑफिसर्स के मुताबिक साथ ही पुल के बन जाने से सेना अब 255 किलोमीटर लंबी रणनीतिक रोड जो दारबुक से दौलत बेग ओल्‍डी तक जाती है, उसकी सुरक्षा भी हो सकेगी। दौलत बेग ओल्‍डी में भारत की आखिरी पोस्‍ट है और यह काराकोराम पास के दक्षिण में पड़ती है। इस पुल को सेना के फॉर्मेशन इंजीनियरों ने तैयार किया है और इंजीनियरों ने चीन की परवाह न करते हुए इस पुल का काम पूरा किया है। यह पुल 60 मीटर लंबा है।

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    पीपी 14 पर हुई थी हिंसा

    पीपी 14 पर हुई थी हिंसा

    15 जून को पेट्रोलिंग प्‍वाइंट (पीपी) 14 पर हुई हिंसा में 16 बिहार, 3 पंजाब रेजीमेंट, दो आर्टिलरी यूनिट और तीन मीडियम रेजीमेंट के अलावा 81 फील्‍ड रेजीमेंट चीन को जवाब देने में शामिल थी। 15/16 जून को पेट्रोलिंग प्‍वाइंट (पीपी) 14 पर बनी एक ऑब्जर्वेशन पोस्‍ट को लेकर चीन और भारतीय सेना के बीच हिंसा हुई थी। उस दिन शाम को भारत की 3 इंफेंट्री डिविजन कमांडर और दूसरे सीनियर ऑफिसर्स श्‍योक और गलवान नदी पर Y जंक्‍शन के करीब भारतीय पोस्‍ट पर थे। इस दौरान भारत और चीन के बीच मेजर जनरल स्‍तर की एक और वार्ता होने वाली थी। सूत्रों के मुताबिक इंडियन आर्मी की 16 बिहार रेजीमेंट समेत बाकी सुरक्षा बल को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था कि उन्‍हें उस पोस्‍ट को हटाना है जो चीनी सेना ने बना ली है।

    चीनी जवानों ने तैयार कर ली थी पोस्‍ट

    चीनी जवानों ने तैयार कर ली थी पोस्‍ट

    इसके बाद एक छोटी पेट्रोलिंग टीम को यह संदेश देने के लिए भेजा गया था। चीनी की उस ऑब्‍जर्वेशन पोस्‍ट पर 10 से 12 सैनिक मौजूद रहते हैं। उन सैनिको भारतीय जवानों ने वहां से चले जाने को कहा और चीनी जवानों ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया था। भारत की तरफ से गई पेट्रोलिंग टीम अपनी यूनिट में लौट आई और इस बारे में अधिकारियों को जानकारी दे दी गई थी।सूत्रों की तरफ से जो जानकारी आई है उसके मुताबिक जब कर्नल बाबू शहीद हो गए तो भारतीय जवानों ने हकीकत में एलएसी को पार किया। वो लगातार 'जय बजरंगबली' बोलते हुए आगे बढ़ रहे थे। कर्नल बाबू शहीद हो चुके थे और 10 जवानों को चीन ने बंदी बना लिया था। कहा जा रहा है कि भारतीय जवानों ने चीनी सेना के टेंट में आग लगा दी थी और बिहारी जवान लगातार लड़ते रहे थे।

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