कारगिल जंग के हीरो मिग-21 और IAF चीफ बीएस धनोआ की बरसोंं बाद हुई मुलाकात

इंडियन एयरफोर्स चीफ एयर चीफ मार्शल बीरेंदर सिंह धनोआ ने उड़ाया करगिल वॉर वाला फाइटर जेट मिग-21। गुरुवार को राजस्‍थान के उत्‍तरालाई एयरबेस से एयरचीफ ने किया था टेक ऑफ।

जयपुर। इंडियन एयरफोर्स (आइएएफ) चीफ एयरमार्शल बीरेंदर सिंह धनोआ ने करीब 18 वर्ष अपने एक ऐसे साथी से मुलाकात की जिसने एक मुश्किल घड़ी में उनका और देश का साथ दिया था। एयरफोर्स चीफ ने उस मिग-21 की सवारी फिर से की जिसने कारगिल की जंग में पाकिस्‍तान से छक्‍के छुड़ा दिए थे। एयर मार्शल धनोआ ने सिंगल सीट वाले इस मिग-21 को अकेले उड़ाया और गुरुवार को राजस्‍थान के उत्‍तरालाई फारवर्ड एयरबेस से उन्‍होंने यह उड़ान भरी।

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30 मिनट तक आसमान में मिग के साथ चीफ

आखिरी बार किसी एयरफोर्स चीफ ने मिग-21 की सोलो फ्लाइंग को वर्ष 2000-2001 में अंजाम दिया था। उस समय एयरफोर्स चीफ एयर मार्शल एवाई टिपनिस थे और उन्‍होंने बरेली से चंड़ीगढ़ तक की उड़ान भरी थी। अपनी उस उड़ान से उन्‍होंने बाकी पायलट्स और देश को संदेश दिया था कि 'फ्लाइंग काफिन' कहे जाने वाले यह फाइटर जेट्स आज भी कीमती हैं। उस समय आए दिन क्रैश की वजह से मिग-21 काफी विवादों में आ गए थे। 60 वर्ष के एयर मार्शल धनोआ ने करीब 30 मिनट तक मिग-21 में उड़ान भरी और उन्‍होंने भी एवाई टिपनिस की ही तरह एक संदेश देशवासियों को दिया और साथ ही पायलट्स का मनोबल ऊंचा करने की कोशिश भी की। मिग-21 का जो वर्जन एयरफोर्स चीफ ने उड़ाया वह अभी तक एयरफोर्स में सर्विस में है। आईएएफ के पास मिग-21 की नौ स्‍क्‍वाड्रन हैं और इनमें से छह स्‍क्‍वाड्रन के मिग-21 बाइसन का अपग्रेडेड वर्जन है। आईएएफ को 44 फाइटर स्‍क्‍वाड्रन की जरूरत है ताकि पाकिस्‍तान और चीन से मिलती चुनौतियों से निबटा जा सके।

3,000 घंटे की फ्लाइंग का अनुभव

एयर मार्शन धनोआ के पास 3,000 फ्लाइंग ऑवर्स का अनुभव है और वह अब तक कई एयरक्राफ्ट्स को फ्लाई कर चुके हैं। जून 1978 में वह इंडियन एयरफोर्स में बतौर फाइटर पायलट कमीशंड हुए थे। मिग-21 ने वर्ष 199 में कारगिल की जंग में आईएएफ के 'ऑपरेशन सफेद सागर' में एक अहम रोल अदा किया था। उस समय धनोआ 17 गोल्‍डन एरो स्‍क्‍वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर थे और पाकिस्‍तानी घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए उन्‍होंने रात में कई सॉर्टीज को कुशलता से अंजाम दिया था। मिग-21 रूस का फाइटर एयरक्राफ्ट है और वर्ष 1963 में आईएएफ में इन्‍हें शामिल किया गया था। इसके साथ ही आईएएफ में पहली बार कोई फाइटर जेट शामिल हुआ था। वर्ष 1965 और 1971 में पाक के खिलाफ युद्ध में मिग-21 ने एयर ऑपरेशंस के दौरान कई अग्रिम मोर्चे पर खास भूमिका अदा की थी। 1971 की लड़ाई में मिग-21 ने ही बांग्‍लादेश स्थित ढाका गर्वमेंट हाउस पर रॉकेट से हमला किया था। इस हमले के बाद ही पाकिस्‍तान की सेना ने सरेंडर किया था।

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