कुलभूषण जाधव मामले को भारत फिर ले जाएगा इंटरनेशनल कोर्ट
बेंगलुरु। पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव से जुड़े मामले में पाकिस्तान ने यू टर्न ले लिया है क्योंकि गुरुवार को पाकिस्तान ने जाधव के लिए दोबारा काउंसलर एक्सेज देने से मना कर दिया है। ऐसे में भारत ने इस मामले को इंटरनेशलन कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) में दोबारा जाकर पाकिस्तान को एक बार फिर पटकनी देने की ठान ली हैं।

इस मामले में भारत ने स्पष्ठ कर दिया है कि हम दोबारा इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस जाएंगे। पाकिस्तान को आईसीजे का आदेश मानना चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा है कि हमारी कोशिश रहेगी कि आईसीजे का फैसला पूरी तरह से लागू हो। उन्होंने यह भी साफ किया कि हम कूटनीतिक माध्यमों के जरिए पाकिस्तान से इस मामले में संपर्क कर रहें हैं।
बता दें जम्मू कश्मीर मामले पर बौखलाया पाकिस्तान हर मामले में भारत से अपनी दुश्मनी निकाल रहा है। इसी कायरता भरे रवैये के तहत उसने जाधव को दोबारा काउंसलर देने से मना कर दिया है। पाक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता फैसल द्वारा जारी बयान में कहा गया था कि जाधव को दूसरा काउंसलर एक्सेस नहीं दिया जाएगा।
गौरतलब है कि जुलाई माह में कुलभूषण जाधव को आईसीजे के आदेश के बाद पाकिस्तान ने दो सिंतबर को जाधव को काउंसलर एक्सेज दिया था। पाकिस्तान ने आईसीजे में मुंह की खाने के बाद भारत को काउंसलर एक्सेस की पेशकश की थी। मोहम्मद फैसल ने ट्वीट किया था "भारतीय जासूस कमांडर कुलभूषण जाधव को राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेंशन, आईसीजे के फैसले और पाकिस्तान के अनुरुप राजनयिक पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी।"
जिसके बाद पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव से पहले काउंसलर एक्सेज (राजनयिक पहुंच) के तहत 2 सिंतबर को भारत के उप उच्चायुक्त गौरव अहलूवालिया ने मुलाकात की।

वर्ष 2016 में हिरासत में लिए जाने के बाद जाधव तक भारत की यह पहली राजनयिक पहुंच थी। अहलूवालिया ने उप-जेल में जाधव से करीब एक घंटे तक मुलाकात की।भारत के विरोध के बावजूद जेल में पाकिस्तानी अधिकारी भी मौजूद थे। यही नहीं इस मुलाकात की विडियो रिकार्डिंग भी की गई।
इस मुलाकात के पहले भारत ने उम्मीद जताई थी कि पाकिस्तान उचित माहौल सुनिश्चित करेगा ताकि स्वतंत्र, निष्पक्ष और सार्थक मुलाकात हो सके। लेकिन पाकिस्तान ऐसा कुछ नहीं किया।
जाधव से इस मुलाकात के बाद विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा था कि एक बात साफ है कि कुलभूषण जाधव पाकिस्तान के भारी दबाव में हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार पाकिस्तान के अपुष्ट दावों को लेकर कुलभूषण जाधव भारी दबाव में हैं।
विदेश मंत्रालय ने साफ कहा था कि कुलभूषण जाधव पर पाकिस्तान के झूठे दावे मानने का दबाव है। जानकारी के अनुसार विदेश मंत्रालय ने कुलभूषण जाधव से आज हुई बातचीत के बारे में उनकी मां को भी अवगत करा दिया है।
बता दें जाधव आतंकवाद, जासूसी और गड़बड़ी करने के आरोप में 2016 से पाकिस्तान की हिरासत में हैं और 2017 में उन्हें एक फौजी अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। जबकि भारत कहता रहा है कि उन्हें ईरान से अगवा किया गया था और पाकिस्तान में उनकी मौजूदगी कभी सबूतों के साथ नहीं बताई गई।

बता दें कि अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) में जाधव केस में भारत की ओर से नामचीन वकील हरीश साल्वे ने लड़ा।
उन्होंने भारत का पक्ष रखते हुए उनके द्वारा दी गयी दलीलों के बाद आईसीजे ने भारत के पक्ष में इतना बड़ा फैसला सुनाया था कि पाकिस्तान को भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को सुनाई गयी फांसी की सजा पर फिर से विचार करना चाहिए।
भारत की इस जीत के बाद साल्वे में लंदन में आयोजित प्रेस कान्फेंस में कहा था कि यह हमारे लिए यह सुनिश्चित करने का समय है कि जाधव को आईसीजे की तरह निष्पक्ष सुनवाई का मौका मिले। यदि पाकिस्तान अभी भी उसे निष्पक्ष सुनवाई देने में विफल रहता है, तो हम वापस ICJमें जा सकते हैं।
साल्वे ने कहा था कि आईसीजे जिस तरह से पूरे मामले की सुनवाई कुछ दिनों के भीतर पूरी हुई, उससे कुलभूषण फांसी से बचा है। पाकिस्तान ने हमेशा जाधव से बरामद कथित पासपोर्ट पर खेलने की कोशिश की। ना केवल कोर्ट ने इसे गलत माना, बल्कि पासपोर्ट दिखाने की वजह पाकिस्तानी के द्वारा उठाए गए नागरिकता के मुद्दे को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया।
उन्होंने यह भी कहा था कि पाकिस्तानी संविधान के मुताबिक कुलभूषण जाधव केस का फ्री ट्रायल हो। अगर पाकिस्तानी कोर्ट सैन्य कोर्ट में ही दोबारा जांच कराता है तो इसकी इजाजत हम नहीं दे सकते हैं। ऐसे में बाहरी वकील की एंट्री नहीं होगी, यह न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। पाकिस्तान ने कोर्ट में जिन विशेषणों का इस्तेमाल किया है, उन्हें मैं व्यक्तिगत तौर पर दुर्भाग्यपूर्ण कहना चाहूंगा। साल्वे ने बताया था कि, पाकिस्तान ने आईसीजे में अपना पक्ष रखते हुए गलतबयानी कर रहा था।












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