अमेरिका से मिले ड्रोन से भारत करेगा हिंद महासागर की निगरानी!
नई दिल्ली। हिंद महासागर पर सुरक्षा इंतजाम और सख्त करने के लिए भारत ने एक अहम कदम उठाया है। भारत की ओर से अमेरिका को एक अनुरोध पत्र लिखा गया है और इस पत्र में भारत ने अमेरिका से ड्रोन की मांग की है। भारत की ओर से यह मांग हिंद महासागर पर गश्त लगाने और सुरक्षा को पहले से दोगुना करने के मकसद से की गई है।

पीएम मोदी के अहम लक्ष्यों का हिस्सा
अमेरिका से ड्रोन की यह रिक्वेस्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उन प्रयासों का हिस्सा है जिसके तहत भारत और हिंद महासागर को मुंबई पर हुए आतंकी हमलों से बचाना है।
आपको बता दें कि इसी माह पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात में अमेरिका ने भारत को एक अहम साझीदारी करार दिया था।
पांच अरब डॉलर से आएंगे ड्रोन
सूत्रों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक भारत ने इस चिट्ठी में अमेरिका के जनरल एटॉमिक्स से अत्याधुनिक मल्टी मिशन मेरीटाइम पैट्रोल प्रीडेटर गार्डियन यूएवी (मानवरहित यान) खरीदने की अनुमति मांगी है।
इस ड्रोन के मिल जाने के बाद भारत को पूर्वी और पश्चिमी तट दोनों तरफ हिंद महासागर में अपनी समुद्री संपदाओं को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
एक अनुमान के मुताबिक भारत अगले कुछ वर्षों में पांच अरब डॉलर से अधिक की लागत से 250 से अधिक यूएवी हासिल करने की आशा कर रहा है।
ड्रोन की खासियत
- 50,000 फिट की ऊंचाई से चींटी की भी पहचान
- यह गश्ती ड्रोन 50,000 फुट की उंचाई पर उड़ने की क्षमता रखता है।
- लगातार 24 घंटे से अधिक समय तक उड़ान भर सकता है।
- समुद्री क्षेत्र में फुटबाल के बराबर की आकार की वस्तुओं पर भी बारीकी से नजर रख सकता है।
- भारत ने पहले भी अमेरिका से इस तरह के ड्रोन को खरीदने की दिलचस्पी दिखाई थी।
- पूर्व में ओबामा प्रशासन इस आग्रह को आगे बढ़ाने में समर्थ नहीं था।
- इसकी वजह थी भारत का एमटीसीआर का सदस्य नहीं था।












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