भारत की वैक्सीन डिप्लोमेसी पर संकट, बांग्लादेश ने रोकी हिल्सा मछली की आपूर्ति
नई दिल्ली, जून 23: भारत-बांग्लदेश के बीच के संबंध दोनों देशों के लिए काफी अहम हैं, लेकिन भारत-बांग्लादेश के बीच का 'गोल्डन चैप्टर' दौर इस समय काफी फीका नजर रहा है। बांग्लादेश में लगभग 16 लाख लोग भारत से भेजी गई वैक्सीन की दूसरी खुराक का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि वे भारत से भेजी गई वैक्सीन की पहली खुराक ले चुके हैं। लेकिन भारत इस समय खुद टीके की कमी से जूझ रहा है ऐसे में भारत ने वैक्सीन निर्यात को रोक रखा है। भारत के इस फैसले पर बांग्लादेश की ओर प्रतिक्रिया आई है।

दरअसल बांग्लादेश ने हिल्सा मछली के निर्यात को कम कर दिया है। जिसे बांग्लादेश की एक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। बता दें कि भारत हिल्सा मछली का बड़ा उपभोक्ता है। बांग्लादेश के सूत्रों का कहना है कि टीकों की डिलीवरी नहीं होने से नाराज हसीना सरकार ने बंगाल की पसंदीदा मछली हिल्सा को प्रतिबंधित कर दिया है। पिछले कुछ समय से देश में हिल्सा के आयात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है।
प्रतिबंधों के बावजूद, शेख हसीना सरकार ने बंगाल को पिछले साल जमाई षष्ठी (बंगाल में एक त्योहार) मनाने में मदद करने के लिए देश में 2 टन हिल्सा आयात करने की विशेष अनुमति दी थी। लेकिन इस साल हालात अलग हैं। लेकिन बंगालियों को इस साल पद्मा (बांग्लादेश में गंगा को कहा जाता है) से हिल्सा का स्वाद नहीं मिल सकेगा। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह अनुमान लगाना गलत होगा कि हिल्सा को टीकों के कारण भारत नहीं भेजा गया है। दोनों देशों के बीच संबंध वैसे भी हिल्सा कूटनीति के अनुकूल नहीं हैं।
बता दें कि, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सीमा समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए ढाका गई थीं, तो उन्होंने मजाक में बांग्लादेश की प्रधान मंत्री शेख हसीना से पूछा था कि मेन्यू में हिल्सा की इतनी सारी किस्में क्यों हैं। हसीना ने कहा था कि, जैसे ही तीस्ता में जल स्तर बढ़ेगा, वैसे भी हिल्सा तैरकर बंगाल तक जा सकेगी। उधर मछुआरा संघ का कहना है कि अब निराश होने की कोई वजह नहीं है। जुलाई 2012 से 2018 तक बांग्लादेश ने हिल्सा नहीं भेजी है। 2019 से, यह फिर से सामयिक उद्देश्य से शुरू हुई है। 2019 और 2020 में बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल के बाजार में मछली की आपूर्ति की गई है।












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