भारत और अमेरिका लगाएंगे दाऊद पर नियंत्रण
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका इस दिशा में काम कर रहे हैं कि अंडरवर्ल्ड डॉन और आतंकी सरगना दाउद इब्राहिम की डी-कंपनी को मिल रही सभी वित्तीय एवं साजो-सामान संबंधी मदद पर कैसे अंकुश लगाया जाए।

सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को भारत-अमेरिकी प्रतिबद्धता पर अमल को लेकर रणनीति बनाने के लिए अपने अमेरिकी समकक्ष तथा ओबामा प्रशासन के दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत का कार्य सौंपा गया है।
डोभाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया अमेरिकी दौरे पर प्रतिनिधिमंडल के साथ नहीं लौटे थे और वह अमेरिका में ही रूक गए थे।
मोदी और राष्ट्रपति बराक ओबामा के बीच बातचीत के बाद जारी साझा बयान में कहा गया था, ‘दोनों नेताओं ने अलकायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, डी कंपनी और हक्कानी जैसे नेटवर्क को मिलने वाली सभी तरह की वित्तीय एवं साजो-सामान संबंधी मदद को रोकने के लिए संयुक्त तथा ठोस प्रयास की जरूरत पर जोर दिया है।'
इसमें कहा गया था, ‘उन्होंने पाकिस्तान के लिए अपना आह्वान फिर दोहराया कि नवंबर, 2008 के मुंबई हमले के गुनाहगारों को न्याय की जद में लाया जाए।'
सरकार के एक शीर्ष सूत्र ने कहा कि डोभाल से यह भी कहा गया है कि वह भारत सहित कई देशों की अमेरिकी सरकार की अनुमति से जासूसी किए जाने के बारे में भी बात करें।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने अमेरिकी समकक्ष जॉन केरी के साथ नयी दिल्ली में 31 जुलाई को यह मुद्दा उठाया था। उस वक्त सुषमा ने कहा था कि भारत की जासूसी ‘अस्वीकार्य' हैं।
सरकार के अधिकारी ने मोदी के अमेरिका दौरा को ‘अत्यंत सफल और परिवर्तनकारी' करार देते हुए कहा कि मोदी द्वारा घोषित अमेरिकी नागरिकों के लिए आगमन पर वीजा को लेकर भारत का फैसला ठोस आदान-प्रदान पर आधारित नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘यह फैसला हमारे अपने हित में किया गया। यह पर्यटन और आगंतुकों की संख्या बढ़ाने के लिए किया गया है।'












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