भारत में जहां खड़ा होगा अमेरिकी जेट वह हिस्सा होगा अमेरिकी सेना का
नई दिल्ली। चीन और पाकिस्तान की करीबी न सिर्फ भारत बल्कि अमेरिका के लिए भी सिरदर्द बन गई है। इस करीबी को देखते हुए और इसका जवाब देने के लिए भारत और अमेरिका ने एक ऐसी डील साइन की है जो कई मायनों में काफी एतिहासिक है।

डील हुई फाइनल
भारत और अमेरिका ने बुधवार को एक दूसरे के को अपने-अपने मिलिट्री बेस को प्रयोग करने की मंजूरी से जुड़ी एक अहम डील को फाइनल कर लिया है।
पाक के साथ ज्वाइंट वॉर एक्सरसाइज और भारत को ठेंगा
इस डील के अमल में आने के बाद दोनों देशों के एयरक्राफ्ट, जेट, वॉरशिप और दूसरे सैनिक साजो-सामानों को एक दूसरे के मिलिट्री बेस पर डेप्लॉय किया जा सकेगा।
अमेरिका कई वर्षों से इस डील को फाइनल करने की कोशिशों में लगा हुआ था। इस समय अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी एश्टन कार्टर भारत दौरे पर आए हुए हैं।
उन्होंने अपने इसी दौरे पर इस डील को अंतिम रूप दिया है। भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर और एश्टन कार्टर ने एक ज्वाइंट प्रेस कांफ्रेस में कहा कि दोनों देशों ने इस समझौते को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
ड्राफ्ट पर जारी बातचीत
समझौते के मसौदे पर बातचीत जारी है और कुछ ही सप्ताह में इस पर सहमति बनने के बाद इस पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। श्री कार्टर ने कहा, यह समझौता होने के बाद हम मिलकर मानवीय अभियान चला सकेंगे। इस डील को विशेषज्ञ चीन के खिलाफ एक अहम गठजोड़ करार दे रहे हैं।
भारत हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी से परेशान है तो अमेरिका के लिए उसने साउथ-चाइना सी में मुश्किलें पैदा कर रखी हैं।
वहीं दूसरी पाक में चीन की ओर से शुरू किए गए प्रोजेक्ट्स भी भारत और अमेरिका के लिए मुश्किलें पैदा कर रहे हैं।












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