लखवी की रिहाई पर भारत सख्त, पाकिस्तान के उच्चायुक्त तलब
इस्लामाबाद/नई दिल्ली| इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को 26/11 हमले के मुख्य षड्यंत्रकारी जकीउर रहमान लखवी को हिरासत में रखे जाने के आदेश को अवैध करार देते हुए जल्द से जल्द रिहा करने का आदेश दिया है। भारत ने लखवी की जेल से रिहाई के आदेश पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और विरोध जताने के लिए नई दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायुक्त को तलब किया है।

यह मुद्दा राज्यसभा में भी उठाया गया और सदन में सदस्यों ने लखवी की रिहाई पर विरोध जताया। वहीं सरकार ने आरोप लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान सरकार ने लखवी के खिलाफ पर्याप्त सबूत उपलब्ध नहीं कराए। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि भारत ने पाकिस्तानी अधिकारियों से बात कर लखवी को रिहा न करने की बात कही है।
कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि पाकिस्तान को लखवी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब किया और इस्लामाबाद उच्च न्यायालय की ओर से लखवी को रिहा करने के आदेश पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
बासित ने बाद में पत्रकारों से कहा कि लखवी पर सुनवाई जारी रहेगी और न्याय प्रणाली को अपना काम करने देना चाहिए।लखवी पर नवंबर 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमले कराने का आरोप है। उसे इस हमले का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है। उसे छह अन्य संदिग्धों सहित फरवरी 2009 से हिरासत में रखा गया है। मुंबई में हुए इस हमले में 166 लोगों की जान चली गई थी, जिसमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे।
गृह राज्यमंत्री किरण रिरिजू ने संवाददाताओं से कहा कि भारत ने पाकिस्तानी अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि लखवी जेल से बाहर नहीं आना चाहिए।उन्होंने कहा, "पाकिस्तान की अदालतों में मुंबई हमले में उसके शामिल रहने से संबंधित सभी दस्तावेज पेश नहीं किए गए हैं। इसीलिए न्यायालय ने उसकी रिहाई के आदेश जारी किए हैं।"
रिजिजू ने कहा, "हम चाहते हैं कि पाकिस्तान सरकार इस मामले को गंभीरता से ले और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए कि उसकी जेल से रिहाई न हो।"राज्यसभा में इस मुद्दे पर थोड़ी देर हंगामा हुआ, क्योंकि कुछ सदस्य इस मामले को सदन में उठाना चाहते थे।
कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि पाकिस्तान के न्यायालय ने लखवी की रिहाई के आदेश जारी कर दिए हैं।उन्होंने कहा, "मुंबई हमला भारत में हुआ था। अगर देश के अंदर आपराधिक घटनाएं होती हैं, तो देश की सीमा के अंदर कानूनी मामला दर्ज किया जाना चाहिए।"
भारत ने इससे पहले पिछले साल लखवी की जमानत पर सख्त रुख अपनाया था। पाकिस्तान में पेशावर के एक सैनिक स्कूल में आतंकवादी हमले के कुछ दिनों बाद उसे जमानत दे दी गई थी।इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने पिछले साल 29 दिसंबर को लखवी की हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया था, लेकिन बाद में इस फैसले को वापस ले लिया गया था।
भाजपा के प्रवक्ता नलिन कोहली ने आईएएनएस से कहा, "जब-जब बात मुंबई आतंकवादी हमले के आरोपियों को सजा दिलाने की आई है तो पाकिस्तान के इरादे और प्रयास लगातार सवालों के घेरे में रहे हैं।"उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आतंक फैलाने में लगे लोगों को दंडित करने में तत्परता दिखाए।
कांग्रेस के प्रवक्ता संजय झा ने कहा कि लखवी 26/11 हमले का मुख्य साजिशकर्ता है और अगर वह रिहा होता है तो इससे भारत के लिए खतरा बढ़ जाता है।झा ने आईएएनएस से कहा, "यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष की है कि उसे रिहा नहीं किया जाए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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