धार्मिक ग्रंथों की पहचान 'गीता प्रेस' अनिश्चितकाल के लिए बंद
लखनऊ। आज भी अगर आप देश के किसी भी कोने में क्यों ना हो लेकिन जब भी किसी हिंदू धार्मिक ग्रंथ को खरीदने की जरूरत आपको महसूस होती है तो आंख बंद करके गीता प्रेस गोरखपुर की किताबें खरीद लेते हैं लेकिन उसी गीता प्रेस पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

क्योंकि गीता प्रेस के मजदूरों और प्रबंधन के बीच किसी बात को लेकर तनातनी चल रही है जिसकी वजह से देश के सबसे पुराने और विश्वसनीय गीता प्रेस में इन दिनों ताला गया है और वो अनिश्चितकाल के लिए बंद हो गया है।
देश की पहचान 'गीता प्रेस' अनिश्चितकाल के लिए बंद
इस बात की जानकारी जिला अधिकारी ने मीडिया को दी है। गोरखपुर जिला स्थित प्रेस को बंद करने पर निराशा प्रकट करते हुए अधिकारी ने कहा कि वीरेंद्र सिंह, राम जीवन शर्मा तथा मुनीवर मिश्रा को साथी कर्मचारियों को भड़काने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया है। लेकिन इस वजह से कर्मचारी हड़ताल पर चले गये हैं जिसकी वजह से गीता प्रेस इन दिनों बंद चल रहा है।
गीता प्रेस प्रकाशन की अब तक 58.25 करोड़ पुस्तकें बिक चुकी हैं
मालूम हो कि "गीता प्रेस, गोविंद भवन कार्यालय की एक इकाई है, जो सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत है। तब से आज तक गीता प्रेस 37 करोड़ गीता, रामायण, भागवत, दुर्गा सप्तशती, पुराण, उपनिषद, भक्त गाथा तथा अन्य चरित्र निर्माण संबंधित पुस्तकें संस्कृत, हिंदी, गुजराती, अंग्रेजी, तमिल, मराठी, बांग्ला, उड़िया, तेलुगू, कन्नड़ तथा अन्य क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं में बेहद कम कीमत पर बेची जा चुकी हैं। गीता प्रेस प्रकाशन की अब तक 58.25 करोड़ पुस्तकें बिक चुकी हैं।
मजदूर यूनियन प्रबंधन से कर रहा है बात
गीता प्रेस केवल एक प्रेस नहीं बल्कि एक भरोसे और पहचान का नाम है ऐसे में अगर यह प्रेस कुछ लोगों के झगड़े की वजह से बंद हो रहा है निश्चित रूप से यह हिंदी साहित्य और साहित्य मार्केट का बहुत बड़ा नुकसान है।












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