चालू वित्त वर्ष में भारत की राजकोषीय आय में 20 लाख करोड़ की कमी आएगी: पूर्व वित्त सचिव
नई दिल्ली। पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने मंगलवार को कहा कि कोरोनावायरस प्रेरित राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को दोषपूर्ण करार देते हुए कहा कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था में चालू वित्त वर्ष में 10 फीसदी का संकुचन अथवा राजकोषीय आय में 20 लाख करोड़ रुपए की कमी आएगी। उनका कहना है कि पिछले 40 वर्षों में यह पहला संकुचन है, जो दोषपूर्ण लॉकडाउन के कारण होगा।

पूर्व वित्त सचिव ने कहा कि सरकार का 21 लाख करोड़ रुपए का प्रोत्साहन पैकेज वास्तव में केवल 1.4-1.5 लाख करोड़ रुपए का है अथवा देश के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 0.7 फीसदी ही है। उन्होंने कहा कि यह निश्चित है कि भारत की जीडीपी 2020-21 में 40 साल बाद संकुचन करेगी और यह भी यह सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 10 फीसदी का बड़ा संकुचन होगा अथवा राजकोषीय आय में लगभग 20 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होगा।

उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2020-21 का वित्तीय वर्ष ऐतिहासिक रूप में नीचे चला जाएगा। यह संकेत देते हुए कि भारत 2019-20 में आर्थिक स्वास्थ्य के पिंक क्षेत्र में नहीं था और उस वर्ष के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था मुश्किल से 4 फीसदी बढ़ी है, जो पिछले 11 वर्षों में सबसे निम्न विकास दर है।

गौरतलब है हाल ही में रेटिंग एजेंसियां फिच और क्रिसिलNSE ने लंबे समय तक लॉकडाउन के कारण चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के आर्थिक विकास के पूर्वानुमान में भारी कटौती की है और भारत के विकास दर का अनुमान 1.45 फीसदी निर्धारित किया है।

हालांकि फिच ने वर्ष 2020-21 में 5 फीसदी संकुचन का अनुमान लगाया था, जो कि अप्रैल के अंत में वैश्विक रेटिंग एजेंसी द्वारा अनुमानित संकुचन अनुमान से 0.8 फीसदी की एक तेज गिरावट को दर्शाता है। क्रिसिल ने भी चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के 5 फीसदी तक सिकुड़ने की भविष्यवाणी की थी। जबकि इससे पहले क्रिसिल ने 1.8 फीसदी की वृद्धि का अनुमान किया था।

पूर्व वित्त सचिव ने कोरोनावायरस के प्रसार की रोकथाम के लिए भारत की लॉकडाउन रणनीति को गलत ठहराते हुए एक बार फिर कहते हैं भारत में लॉकडाउन एक अनुभवहीन विश्वास के तहत थोपा गया था कि वह महज तीन सप्ताह में भारत के नक्शे से COVID -19 को खत्म करने में सक्षम होगा।

उन्होंने आगे कहा, कम्पीलट आर्थिक बंदी और राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के जरिए भारत ने ब्रह्मास्त्र का उपयोग करने का फैसला किया जबकि देश का एक छोटा हिस्सा ही तब केवल संक्रमित था।

गौरतलब है नोवल कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत 24 मार्च को 21 दिनों के लिए पहली बार राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी। लॉकडाउन को पहले 3 मई तक और फिर 17 मई तक बढ़ाया गया था। इसे आगे 31 मई तक बढ़ा दिया गया था और अब इसे 30 जून तक कंटेनमेंट जोन में बढ़ा दिया गया है।
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