अपनी पहली सफल यात्रा कर वापस लौटा भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत 'विक्रांत'
भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत (IAC) विक्रांत अपनी पहली समुद्री यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद रविवार को तट पर लौट आया।
नई दिल्ली, 8 अगस्त। भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत (IAC) विक्रांत अपनी पहली समुद्री यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद रविवार को तट पर लौट आया। भारतीय नौसेना ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमारा परीक्षण योजना के अनुसार आगे बढ़ा और सभी मानदंडों पर खरा उतरा। 4 अगस्त को कोच्चि से रवाना हुए (IAC) विक्रांत के बारे में भारतीय नौसेना ने कहा कि सेना में शामिल होने से पहले अभी इस पोत को कई अन्य परीक्षणों से गुजरना होगा ताकि इसके सभी उपकरणों और प्रणालियों की ठीक से जांच की जा सके। इंडियन नेवी के मुताबिक इसकी पहली यात्रा के दौरान इसकी पतवार और मुख्य प्रणोदन, बिजली उत्पादन और वितरण और सहायक उपकरण सहित जहाज के प्रदर्शन का परीक्षण किया गया।

आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर हो सकता है सेना में शामिल
दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल एके चावला ने परीक्षणों की समीक्षा की। 2022 में भारतीय नौसेना को सौंपे जाने से पहले अभी इस पोत को कई अन्य परीक्षणों से गुजरना होगा। सेना के अनुसार कोरोना के उपयुक्त व्यवहारों का पालन करते हुए इसके पहले परीक्षण का आयोजन किया गया जो सफल रहा। सेना ने कहा कि यह एक दशक से अधिक समय से इसके निर्माण कार्य में लगे लोगों के समर्पित प्रयासों का परिणाम है। साथ ही यह एक ऐतिहासिक घटना भी है। उम्मीद की जा रही है कि भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर नौसेना को इसे सौंप दिया जाएगा। यह सरकार की मेक इन इंडिया पहल को मजबूती प्रदान करेगा।
निर्माण में 76% स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ
स्वदेश विमानवाहक पोत विक्रांत का डिजाइन नौसेना के नौसेना डिजाइन निदेशालय द्वारा बनाया गया था, जबकि इसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा किया गया। इस युद्धपोत की खास बात यह है कि इसके निर्माण में 76% स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। इस पोत की लंबाई 262 मीटर, चौड़ाई 62 मीटर और ऊंचाई 59 मीटर है। जहाज में 2,300 से अधिक डिब्बे हैं, जिन्हें लगभग 1700 लोगों के दल के लिए डिज़ाइन किया गया है।












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