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देश में मिला पहला डिस्क-फुट वाला दुर्लभ चमगादड़, जानिए चीन से सीधा कनेक्शन

शिलॉन्ग, 20 अप्रैल: वैज्ञानिकों की एक टीम ने मेघालय में देश के पहले डिस्क आकार के चिपचिपे पैर वाले चमगादड़ों का पता लगाया है। भारत के लिए यह बहुत ही दुर्लभ चमगादड़ की प्रजाति है और खासकर कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच यह खबर खलबली मचा सकती है। बता दें कि कोरोना वायरस का चमगादड़ से सीधा नाता बताया जाता है और पूरी दुनिया इसीलिए चीन के लोगों की खाने-पीने की आदतों को कोसती रही है। इस खोज के बाद भारत में चमगादड़ की प्रजातियों की संख्या बढ़कर 130 हो गई है और पूर्वोत्तर के राज्य मेघालय में इनकी तादाद 66 हो गई है। इस चमगादड़ की विशेषता यह है कि यह बांस के जंगलों में आसानी से अपना कुनबा बढ़ा सकते हैं।

मेघालय में डिस्क आकार के चिपचिपे पैर वाले चमगादड़ मिले

मेघालय में डिस्क आकार के चिपचिपे पैर वाले चमगादड़ मिले

मेघालय में वैज्ञानिकों को डिस्क आकार के चिपचिपे पैर वाले जो चमगादड़ मिले हैं उसका जीव-वैज्ञानिक नाम यूडिस्कोपस डेंटिक्युलस है। जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के शिलॉन्ग कार्यालय के उत्तम साइकिया की अगुवाई वाली वैज्ञानिकों की टीम ने इस प्रजाति का पता लगाया है। इस टीम में यूरोपियन नैचुरल हिस्ट्री म्यूजियम के भी कुछ वैज्ञानिक शामिल थे, जिन्होंने इसे पिछले साल जुलाई में नोंगखिल्लेम वाइल्डलाइफ सैंचुरी के पास लैलाड में जुलाई में देखा था। यह खोज तब सुर्खियों में आया है, जब हाल ही में जिनेवा म्यूजियम एंड दि स्वीस जूलॉजिकल सोसाइटी के द्विवार्षिक जर्नल रिव्यू सुइसे डे ज़ूलोजी में इसे प्रकाशित किया गया है। यह बांसों में रहने वाली बहुत ही विशेष प्रकार की चमगादड़ प्रजाति है।

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    बहुत ही दुर्लभ है चमगादड़ की ये प्रजाति

    बहुत ही दुर्लभ है चमगादड़ की ये प्रजाति

    इस खोज के बारे में जारी प्रेस नोट में कहा गया है, 'यह प्रजाति अंगूठे और चमकीले नारंगी रंग में प्रमुख डिस्क जैसे पैड की वजह से दिखने में बहुत विशिष्ट है।' इसमें आगे कहा गया है, 'पैरों में हुए बदलाव की वजह से इसे बांसों ने रहने वाली प्रजाति मान लिया गया, जिसके बाद इसकी डिस्क-फुट वाले चमगादड़ के रूप में पहचान हुई। अपने चिपचिपे डिस्क की वजह से ये बांसों के अंदर आसानी से घूम सकता है।' शोधकर्ताओं ने पाया है कि वैसे तो पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में बांसों में रहने वाली चमगादड़ की प्रजाति मिलना तो सामान्य है, लेकिन यह खास तरह की प्रजाति बहुत ही दुर्लभ है और दुनियाभर में यह कुछ ही जगहों पर पाया गया है।

    दक्षिण चीन के अलावा कुछ ही देशों में पाई जाती है यह प्रजाति

    दक्षिण चीन के अलावा कुछ ही देशों में पाई जाती है यह प्रजाति

    अबतक डिस्क-फुट वाले चमगादड़ सिर्फ दक्षिण चीन में ही पाए जाते थे। इसके अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ ही देशों में ही इसकी मौजूदगी इससे पहले देखी गई थी। मेघालय में जो प्रजाति मिली है, वह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका इससे पहले का ज्ञात ठिकाना यहां से करीब 1,000 किलोमीटर पूर्व की ओर है। चीन के अलावा वियतनाम, थाईलैंड और म्यामांर के कुछ इलाकों में भी इस प्रजाति की मौजूदगी पाई गई है। मेघालय में मिले चमगादड़ के डीएनए को जब वियतनाम वाली प्रजाति से डीएनए मैच किया गया तो पता चला कि दोनों में बहुत ज्यादा अंतर होने के बाद भी वह एक तरह की लगते हैं।

    बांस के जंगल बढ़ने को बताया जा रहा है कारण

    बांस के जंगल बढ़ने को बताया जा रहा है कारण

    शोधकर्ताओं का अनुमान है कि मेघालय और वियतनाम वाली प्रजातियों की उत्पत्ति एक ही है और इनकी संख्या उन जगहों पर हाल में बढ़ी है, जहां हाल के कुछ वर्षों में लोगों ने बांस के जंगल लगाए हैं। वैज्ञानिकों ने पाया है कि इनकी कोशिका की संरचना बांस के अंदर के खांचे में फिट बैठने के लिए पूरी तरह से उपयुक्त हो चुकी है। गौरतलब है कि कोरोना वायरस के बारे में भी बताया जाता है कि यह चमगादड़ों से ही इंसानों तक पहुंचकर कहर मचा रहा है। इस मामले में चीन के वैज्ञानिकों की भूमिका हमेशा से संदिग्ध रही है। इसलिए अगर चीन से जुड़ी चमगादड़ की कोई प्रजाति अगर पहली बार भारत में मिलती है तो सवाल कई उठ सकते हैं। (पहली तस्वीर छोड़कर बाकी प्रतीकात्मक)

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