भारत को मिलेगी दुनिया की घातक सबमरीन INS कलवारी, चीन के उड़े होश

आईएनएस कलवारी को पिछले साल सितंबर में ही नेवी को सौंपा जाना था, लेकिन ट्रायल में देरी के चलते इसकी डेडलाइन टालनी पड़ी। भारत ने ऐसी 6 सबमरीन का ऑर्डर दिया था, कलवारी इसमें पहली है।

नई दिल्ली। सिक्किम के डोकलाम एरिया में भारत और चीन के बीच विवाद जारी है। इसी बीच भारतीय नेवी की ताकत बढ़ने जा रही है, भारत को इसी महीने अंडरवाटर फाइटर आईएनएस कलवारी मिलने वाली है। दुनिया की सबसे घातक पनडुब्बी में से एक आईएनएस कलवारी के मिलने से इंडियन नेवी की अंडरवाटर फाइटिंग फोर्स की ताकत बढ़ जाएगी।

अंडरवाटर फाइटर है आईएनएस कलवारी

अंडरवाटर फाइटर है आईएनएस कलवारी

आईएनएस कलवारी डीजल और इलेक्ट्रिक सबमरीन है। इसमें लगे हथियार दुश्‍मन पर सटीक हमला कर उसे पस्‍त करने की ताकत रखते हैं। टॉरपीडो के साथ हमलों के अलावा इससे पानी के अंदर भी हमला किया जा सकता है। साथ ही सतह पर पानी के अंदर से दुश्‍मन पर हमला करने की खासियत भी इसमें है। यह डीजल और इलेक्ट्रिक दोनों ही ताकतों से लैस है। इस पनडुब्‍बी को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसे किसी भी तरह की जंग में ऑपरेट किया जा सकता है। इस पनडुब्‍बी में ऐसे कम्‍युनिकेशन मीडियम लगाए गए हैं कि दूसरी नेवल टास्‍क फोर्स के साथ आसानी से कम्‍युनिकेट किया जा सके।

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    आईएनएस कलवारी नाम एक प्रकार की शार्क मछली से लिया गया

    आईएनएस कलवारी नाम एक प्रकार की शार्क मछली से लिया गया

    आईएनएस कलवारी को पिछले साल सितंबर में ही नेवी को सौंपा जाना था, लेकिन ट्रायल में देरी के चलते इसकी डेडलाइन टालनी पड़ी। भारत ने ऐसी 6 सबमरीन का ऑर्डर दिया था, कलवारी इसमें पहली है। आईएनएस कलवारी को फ्रांस की कंपनी DCNS के साथ मिलकर मुंबई स्थित मझगांव डॉकयार्ड में तैयार किया गया है। आईएनएस कलवारी नाम एक प्रकार की शार्क मछली से लिया गया है। इस मछली को टाइगर शार्क कहते हैं।

    फ्रांस की कंपनी ने दी है टेक्नोलॉजी

    फ्रांस की कंपनी ने दी है टेक्नोलॉजी

    मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDSL) के चेयरमैन और एमडी कमोडोर राकेश आनंद ने पिछले महीने कहा था कि आईएनएस कलवारी को अगस्त में नेवी को सौंपा जा सकता है। इसके सभी ट्रायल सफल हुए हैं। हालांकि इसके कमीशनिंग की डेट फाइनल होना बाकी है। मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDSL) डिफेंस मिनिस्ट्री के तहत डिफेंस प्रोडक्ट्स तैयार करती है। MDSL प्रोजेक्ट 75 के तहत फ्रांसीसी कंपनी DCNS के साथ मिलकर स्‍कॉर्पीन क्‍लास की सबमरीन्स तैयार कर रही है। फ्रांसीसी कंपनी ने इसके लिए टेक्नोलॉजी मुहैया कराई है।

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