• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

भारत पाकिस्तान सीमा: आख़िरी बूथ पर वोटिंग का आंखो देखा हाल

By प्रियंका दुबे

जैसलमेर
BBC
जैसलमेर

धूप में तपते रेत के टीलों की लम्बी क़तारें पार करते हुए हम जैसलमेर से कुल 150 किलोमीटर दूर राजस्थान के बाड़मेर लोकसभा क्षेत्र के आख़िरी गांव 'मुरार' पहुंचते हैं.

भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित इस आख़िरी गांव में ही मौजूद है थार रेगिस्तान के बीचों बीच खड़ा भारत का आख़िरी पोलिंग स्टेशन.

'न्यूटन' फ़िल्म की याद दिलाते हुए 6 निर्वाचन अधिकारियों की टीम आज चुनाव करवाने के लिए 'मुरार का तला प्राथमिक विद्यालय' नामक इस पोलिंग बूथ पर पहुंची.

बूथ इंचार्ज सत्यनारायण ने बीबीसी को बताया कि भारत-पाकिस्तान सीमा इस पोलिंग बूथ से मात्र 2 किलोमीटर दूर है.

आर्मी और बॉर्डर सेक्योरिटी फ़ोर्स (बीएसएफ़) से घिरे इस संवेदनशील क्षेत्र में सुबह 8 बजे से ही मतदाता वोट देने के लिए क़तार में खड़े थे.

मतदान
BBC
मतदान

टूटे स्कूल में बना पोलिंग बूथ

इस बूथ तक पहुंचने के अपने अनुभव के बारे में बताते हुए निर्वाचन अधिकारी सत्यनारायण बताते हैं, "यह जैसलमेर का सबसे दूरस्थ पोलिंग बूथ ये है. कल सुबह जैसे ही हमको बताया गया की इस बार चुनाव में हमारी ड्यूटी इस बीहड़ में बॉर्डर के पास लगी है तो हमारे दिल में भी बहुत जिज्ञसा हुई. हम सोच में भी पड़ गए की बॉर्डर के सबसे पास का गांव आपको मिला है तो यहां पता नहीं कैसा माहौल होगा. लेकिन लोगों में उत्साह है और मतदान सभी नियम क़ानून के अनुसार हो रहा है."

मात्र 304 मतदाताओं के लिए खड़ा किया गया यह पोलिंग बूथ मुरार गांव के टूटे हुए प्राइमरी स्कूल में बना है.

इस बूथ पर 2012 के काम कर रहे निर्वाचन अधिकारी रामअवतार मीणा बताते हैं, "यहां इस पोलिंग बूथ के अंतर्गत 6 ढानियाँ (छोटे गांव) आती हैं. यहां की बहुत मुश्किल परिस्थितियां हैं. एक ढानी जो बूथ से 40 किलोमीटर दूर है तो दूसरी यहां से 60 किलोमीटर दूर है. लेकिन दूर दूर से मतदाता यहां वोटिंग करने के लिए आते हैं. उसी तरह चुनाव के पहले मैं भी उनसे मिलने के लिए दूर दूर तक जाता हूं और उन्हें वोट डालने जाने के लिए प्रोत्साहित करता हूं."

विषम परिस्थितियों के बीच मौजूद इस दूरस्थ पोलिंग स्टेशन पर अपना वोट डालने के लिए आज मतदाता सुबह 6 बजे से उठकर और फिर पैदल चलकर आए हैं.

मतदान
BBC
मतदान

रेगिस्तान और पैदल रास्ता

कई मतदाताओं ने यहां मतदान करने के लिए 10-10 किलोमीटर का रेगिस्तान पैदल पार किया.

कर्मावली गांव के रहमान बताते हैं कि वो सूरज उगने से पहले ही वोट देने के लिए अपने ढानी से निकल पड़े थे.

वो कहते हैं, "मेरा गांव तो बारह किलोमीटर दूरी है लेकिन मैं हर बार वोट डालने के लिए यहां आता हूं. घड़ी तो नहीं देखी लेकिन आज सुबह भी सूरज उगने से पहले ही घर से निकला पड़ा और पैदल पैदल रेगिस्तान पार करते हुए अब यहां आ पहुंचा हूं."

वहीं अपने गांव के साथियों के साथ कुछ दूरी पर रेत में बैठे फतेह ख़ान वोट देने के बाद सुस्ता रहे थे.

पूछने पर वह कहते हैं, "सुबह से चलते चलते थक गया हूं. वोट देने आने के लिए मुझे बहुत दूर तक चलना पड़ा. यहां सभी लोग बहुत दूर दूर से आते हैं. कुछ लोग जीप किराए पर लेकर आते हैं तो कुछ मेरी तरह पैदल...क्योंकि यहां रास्ते नहीं हैं और आने जाने के लिए रेत में गाड़ी का साधन भी नहीं है."

मतदान
BBC
मतदान

"लेकिन वोट डालना ज़रूरी है इसलिए हम आते हैं. क्योंकि अगर हम अपना नेता ख़ुद चुनकर नहीं भेजेंगे तो कल को बिजली-पानी से जुड़े अपने काम किससे करवाएंगे?"

तपते रेगिस्तान में मात्र 304 मतदाताओं के लिए खड़ा यह पोलिंग बूथ इस बात की गवाही देता है की भारतीय लोकतंत्र में इस सबसे बड़े त्योहार में देश के हाशिए पर रहने वाले आख़िरी भारतीय नागरिक के वोट के क़ीमत भी बाक़ी देशवासियों के वोटों के बराबर है.

BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
India Pakistan border live voting on the last booth
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X