गुरुनानक देव की 550वीं जन्मतिथि पर करतारपुर कॉरिडोर को खोलेगा भारत, अब फैसला पाकिस्तान पर
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नई दिल्ली। सरकार ने गुरुवार को इस बात का ऐलान कर दिया है कि वह पंजाब के गुरदासपुर में स्थित करतारपुर कॉरिडोर अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर तक निर्माण करेगी। सरकार के इस फैसले के साथ ही अब गेंद पाकिस्तान के पाले में है और अब पाक को फैसला लेना है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बारे में बताया। आपको बता दें कि अगस्त माह में पंजाब से कांग्रेस के नेता और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत की थी। सिद्धू ने पाक की नई सरकार से अनुरोध किया था कि इस कॉरिडोर को सिख अनुयायियों के लिए खोल दिया जाए। इसके बाद सितंबर माह में खबर आई थी कि पाक इस कॉरिडोर को खोलने पर राजी हो गया है लेकिन फिर उसने अपने सुर बदल लिए थे।

अब गेंद पाक के पाले में
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बारे में बताया कि कॉरिडोर को गुरदासपुर जिले में स्थित डेरा बाबा नानक से शुरू किया जाएगा और भारत में स्थित अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर तक जाएगा। सरकार का कहना है कि वह पाकिस्तान सरकार से अनुरोध करेगी कि इसी तरह का कॉरीडोर अपनी जमीन पर स्थित गुरुद्ववारा दरबार साहिब तक तैयार करे, जहां पर गुरु नानक देव ने अपनी जिंदगी के 18 वर्ष बिताए थे। करतारपुर कॉरीडोर को इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया जाएगा।
विदेश मंत्रालय ने दिया बयान
विदेश मंत्रालय की ओर से इस पर आधिकारिक बयान दिया गया है। मंत्रालय ने कहा है, 'साल 2019 में गुरुनानक देव जी की 550वीं जन्मतिथि है और ऐसे में हमने पाकिस्तान सरकार से अपील की है कि वह सिखों की भावनाओं को समझे और कॉरिडोर का निर्माण करे।' विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत सरकार की ओर से सभी सुविधाओं से लैस इस कॉरिडोर को निर्मित कराने का फैसला ले लिया गया है।पिछले माह पाकिस्तान ने कहा था कि कॉरीडोर को खोलने का इसका फैसला सिर्फ इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत, उसके साथ कोई बातचीत करना चाहता है या नहीं।

सिखों को नहीं लेना होगा कोई वीजा
अगर पाकिस्तान भी भारत की ही तरह निर्णय लेता है तो फिर भारत से सिख बिना वीजा दर्शन के लिए जा सकेंगे। करतारपुर साहिब सिखों के प्रथम गुरु, गुरुनानक देव जी का निवास स्थान था और यहीं पर उनका निधन हुआ था। बाद में उनकी याद में यहां पर एक गुरुद्वारा भी बनाया गया। करतारपुर साहिब, पाकिस्तान के नारोवाल जिले में है जो पंजाब मे आता है। यह जगह लाहौर से 120 किलोमीटर दूर है। जहां पर आज गुरुद्ववारा है वहीं पर 22 सितंबर 1539 को गुरुनानक देवजी ने आखिरी सांस ली थी।












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