मोदी सरकार के इस बड़े फैसले से Google-Facebook-Apple जैसी कंपनियां होंगी प्रभावित !
Google और Facebook जैसी दिग्गज कंपनियों को राजस्व शेयर करने का फैसला लेना पड़ सकता है। खबरों के मुताबिक सरकार इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) कानून में संशोधन पर विचार कर रही है।
नई दिल्ली, 16 जुलाई : गूगल और फेसबुक को रेवेन्यू शेयर करना पड़ सकता है। सरकार आईटी कानून में अहम बदलाव (India IT law revision) पर मंथन कर रही है। इसके तहत गूगल, फेसबुक, ऐप्पल जैसे टेक दिग्गजों ने अपने प्लेटफॉर्म पर समाचार प्रकाशकों की जो सामग्री प्रदर्शित की है, इससे मिलने वाले राजस्व को साझा करना पड़ सकता है। दरअसल, डिजिटल न्यूज वेबसाइट के कंटेंट को अपने प्लेटफॉर्म पर दिखाकर ये कंपनियां मोटा राजस्व कमाती हैं।

कैसे पैसे कमाती हैं Google-Facebook
सरकार की ओर से कानून में बदलाव की पहल को डिजिटल समाचार प्रकाशकों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है। इंडियाटुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार नियामक हस्तक्षेप पर विचार कर रही है, जिसे लागू करने पर यूट्यूब के मालिक Google, मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप के मालिक), ट्विटर और अमेजॉन जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियों को राजस्व शेयर करना होगा। कानून में बदलाव के बाद भारतीय समाचार पत्रों और डिजिटल समाचार प्रकाशकों को अनिवार्य रूप से रेवेन्यू शेयर करना होगा। रेवेन्यू शेयर करने का कारण समाचार माध्यमों के ओरिजनल कंटेंट को इन प्लेटफॉर्म पर दिखाया जाना है। ऐसा करने से ये दिग्गज टेक कंपनियां राजस्व अर्जित करती हैं।
Revenue Sharing पर चर्चा
डिजिटल समाचार मध्यस्थ (Digital news intermediaries) ऐसे प्लेटफॉर्म हैं जिनके माध्यम से इंटरनेट यूजर समाचार मीडिया वेबसाइट्स के ओरिजनल कंटेंट तक पहुंच सकते हैं। ऐसे में दुनिया भर में टेक दिग्गजों और न्यूज प्लेटफॉर्म के बीच रेवेन्यू शेयरिंग को लेकर चर्चा हो रही है। भारत में समाचार प्रकाशक भी प्रभावित होने की बात कह रहे हैं।
सरकार कानून क्यों ला रही है?
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल की शुरुआत में, कनाडा सरकार ने एक कानून पेश किया। इसके तहत डिजिटल समाचार प्रकाशकों और Google और Facebook जैसे प्लेटफार्म के बीच अनिवार्य राजस्व शेयर निष्पक्षता के साथ किया जा सकेगा। कानून की जरूरत क्यों हुई ? इस सवाल पर जानकारों का मानना है कि Google और Facebook जैसे तकनीकी दिग्गज मीडिया घरानों के ओरिजनल कंटेंट दिखाकर राजस्व अर्जित करते हैं, लेकिन वे राजस्व को उचित रूप से शेयर नहीं करते।
पक्षपात के आरोप
नए समाचार प्रकाशकों के लिए, यह चिंता बढ़ती जा रही है कि डिजिटल समाचार मध्यस्थ (Digital news intermediaries) राजस्व को साझा नहीं करते, और उनके पास अपारदर्शी राजस्व मॉडल हैं जो खुद के हित का अधिक ध्यान रखते हैं। इससे अत्यधिक पक्षपात होता है।
डिजिटल विज्ञापन पर जांच
आईटी कानून में बदलाव से जुड़ी टाइम्स ऑफ इंडिया (टीओआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा है, बड़ी टेक कंपनियां डिजिटल विज्ञापन पर बाजार की शक्ति का प्रयोग कर रही हैं। इससे भारतीय मीडिया कंपनियों को नुकसान हो रहा है। नए कानून और नियमों के संदर्भ में इसकी गंभीरता से जांच की जा रही है।
DNPA की शिकायत पर जांच
गौरतलब है कि दिसंबर 2021 में भारत सरकार ने कहा था कि फेसबुक और Google जैसी तकनीकी दिग्गजों को समाचार सामग्री के लिए स्थानीय प्रकाशकों को भुगतान करने की कोई योजना नहीं है। हालांकि, डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) की एक शिकायत के बाद, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने इस साल की शुरुआत में Google की प्रमुख स्थिति के कथित दुरुपयोग की जांच का आदेश दिया था।
गूगल तय करता है, सर्च में कौन ऊपर दिखेगा ?
DNPA भारत की कुछ सबसे बड़ी मीडिया कंपनियों का एसोसिएशन है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक DNPA ने कहा है कि Google ने अपने सदस्यों को उचित विज्ञापन राजस्व देने से इनकार कर दिया है। DNPA का आरोप है कि समाचार आउटलेट की वेबसाइट्स पर कुल ट्रैफ़िक का 50 परसेंट से अधिक Google के माध्यम से आता है, लेकिन Google अपने एल्गोरिदम के माध्यम से निर्धारित करता है कि कौन सी समाचार वेबसाइट सबसे पहले उसके प्लेटफार्म पर खोजी जाए।
इन देशों में अनिवार्य रेवेन्यू शेयरिंग
इंटरनेट की दुनिया में गूगल और फेसबुक जैसे वैश्विक दिग्गज अब तक भारत में राजस्व बंटवारे की ऐसी मांगों के प्रति प्रतिबद्ध नहीं रही हैं। हालांकि, उन्हें ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे कुछ देशों में अनिवार्य रूप से राजस्व साझा करना पड़ता है। वहां के कानूनों के तहत इन कंपनियों ने समझौते किए हैं।
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