विदेशों में शरण लेने वाले 184 भगोड़ों को भारत ने जियोलोकेट किया, अब वापस लाने की तैयारी
विदेशों में शरण लेने वाले 184 भगोड़ों का भारत ने आखिरकार पता लगा लिया है। अब इंटरपोल और संबंधित देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद से उनकी वापसी के लिए भारत ने औपचारिक कार्यवाही शुरू कर दी है। यह जानकारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार को दी है।
प्रवीण सूद और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के प्रमुख दिनकर गुप्ता ने वियना में इंटरपोल की 91वीं आमसभा में अपराध, अपराधियों और अपराधों की आय के लिए किसी भी सुरक्षित आश्रय से इनकार करने पर जोर दिया।

संघीय भ्रष्टाचार निरोधक जांच एजेंसी पहले ही इस साल कम से कम 24 भगोड़ों की वापसी का कॉर्डिनेशन कर चुकी है। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के बीच बढ़ते सहयोग के परिणामस्वरूप 2021 से 65 से अधिक ऐसे व्यक्तियों को वापस लाया गया है। पिछले साल जहां 27 अपराधियों को भारत वापस लाया गया। वहीं, 2021 में 18 को वापस लाया गया।
भारत ने विभिन्न देशों में 184 से अधिक अपराधियों का पता लगाया
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीबीआई ने एक बयान में कहा कि यह याद किया जा सकता है कि 2023 में भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा वांछित 24 अपराधियों और भगोड़ों को इंटरपोल चैनलों के माध्यम से करीबी कॉर्डिनेशन के माध्यम से विदेश से भारत लाया गया था, जो एक साल में अब तक के सबसे अधिक मामलों में से एक है। इसके अलावा, भारत ने विभिन्न देशों में 184 से अधिक अपराधियों का पता लगाया है और उनकी वापसी के लिए औपचारिक कार्यवाही शुरू की है। यह अपराध और अपराधियों से निपटने के लिए इंटरपोल चैनलों के बढ़ते लाभ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ संबंधों को दर्शाता है।
भारत में 277 लोग वांछित
भारतीय एजेंसियों द्वारा अपराधियों का जियोलोकेशन करने से तात्पर्य तकनीकी डेटा, फोन स्थान, आपराधिक गतिविधि और ह्यूमन इंटेलिजेंस समेत विभिन्न माध्यमों का उपयोग करके उनके ठिकाने का पता लगाना है। इंटरपोल डेटा से पता चलता है कि वर्तमान में भारत में 277 लोग वांछित हैं, जिनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट लंबित हैं।












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