देश में 190 मकानों की किल्लत, फिर भी 110 लाख मकान खाली
नई दिल्ली। जब आप अपने शहर को छोड़ दूसरे शहर नौकरी या पढ़ाई करने जाते हैं, तो सबसे पहला काम होता है किराये का मकान ढूंढ़ना! कई दिनों तक दौड़-धूप के बाद आपको मनमुताबिक घर मिल पाता है। दिक्कत इसलिये होती है, क्योंकि देश में 190 लाख मकानों की किल्लत है। लेकिन आप यह जानकर चकित रह जायेंगे कि देश में करीब 110 लाख मकान खाली पड़े हैं, जहां रहने वाला कोई नहीं।

यह विडंबना इसलिये है, क्योंकि गांवों, छोटे शहरों व कस्बों से शहरों की ओर हो रहे माइग्रेशन के कारण शहरों खचा-खच भरते जा रहे हैं। यही कारण है कि मकानों के किराये में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। बेंगलुरु के बीटीएम जैसे इलाके में 2बीएचके फ्लैट का किराया 15 से 20 हजार रुपए तक होता है। ऊपर से एक साल का डिपॉजिट अलग। वहीं दिल्ली में तो इससे भी बुरे हाल हैं।
किराये के मकानों से जुड़े रोचक तथ्य
- भारत में कुल मकानों में किराये के मकानों का हिस्सा महज 11 फीसदी ही है।
- कुल मकानों में किराये के मकानों का हिस्सा नीदरलैंड में 35 फीसदी है।
- हांगकांग में 31 फीसदी, ऑस्ट्रिया में 23 फीसदी और ब्रिटेन में 20 फीसदी किराये के मकान हैं।
- जेएनएनयूआरएम के तहत शहरी गरीबों के लिए बनाए गए 2.37 लाख से ज्यादा मकान खाली पड़े हैं।
सरकार की नई नीति
सरकार राष्ट्रीय किराया आवास नीति 2015 का मसौदा तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य नियामकीय एवं कानूनी सुधारों के अनुपालन, धन प्रवाह में बढ़ोतरी और किराये के मकानों के स्टॉक के निर्माण, प्रबंधन, रख-रखाव एवं सृजन के लिए संस्थानों को प्रोत्साहन के जरिए किराये के मकानों वाले क्षेत्र को अत्यंत सक्रिय एवं औपचारिक स्वरूप प्रदान करना है।
क्या कहते हैं शहरी विकास मंत्री
केंद्रीय मंत्री वैंकैया नायडू कहते हैं कि देश में किराये के मकानों के निर्माण को बढ़ावा देने की जरूरत है। ऐसा इसलिये क्योंकि बहुत तेजी से लोग शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। नायडू ने कहा कि किराया नियंत्रण कानून, किराये पर कम प्राप्ति, निराशाजनक रख-रखाव, निर्माण की निम्न गुणवत्ता, नियंत्रण खोने के भय और खुद के स्वामित्व वाले मकानों के निर्माण पर विशेष जोर देने के चलते ही देश में किराये के मकानों के क्षेत्र में निवेश के साथ-साथ उनकी उपलब्धता पर भी अत्यंत प्रतिकूल असर पड़ता रहा है। इसके लिये सरकार जरूरी कदम उठा रही है।












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